उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण पर दिया जोर

बेंगलुरु, (वार्ता) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण पर जोर दिया और इसे एक ऐसा मील का पत्थर बताया जो लचीलेपन, रचनात्मकता और अंतःविषय शिक्षा के माध्यम से छात्रों को सशक्त बनाता है।

श्री राधाकृष्णन ने आज मैसूर में जेएसएस उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान अकादमी (जेएसएस एएचईआर) के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्नातकों से विनम्रता के साथ उत्कृष्टता प्राप्त करने और अपनी महत्वाकांक्षाओं को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ने का आग्रह किया। स्वामी विवेकानंद के अमर आह्वान ‘उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको’ का हवाला देते हुए उन्होंने सफलता की आधारशिला के रूप में निरंतरता और दृढ़ता के गुणों पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्नातकों को उपलब्धि की अपनी अनूठी लय खोजने तथा चुनौतियों के बीच दृढ़ रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

कर्नाटक की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की शास्त्रीय भाषाओं में से एक के रूप में कन्नड़ की स्थिति की सराहना की और कहा कि शिक्षा, साहित्य और प्रौद्योगिकी में राज्य का योगदान राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया का ज़िम्मेदारी से उपयोग करने, ऑनलाइन जुड़ाव और वास्तविक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने और माता-पिता व बड़ों के प्रति सम्मान विकसित करने की भी सलाह दी। उन्होंने युवाओं से दूसरों की कमियों पर ध्यान देने के बजाय उनके सकारात्मक गुणों को अपनाने का आग्रह किया और ज्ञान को “सच्चा धन” बताया जो मन और राष्ट्र दोनों को प्रकाशित करता है।

दीक्षांत समारोह में कुल 2,925 छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा और फ़ेलोशिप प्रदान की गईं, जबकि 16 स्वर्ण पदक विजेताओं को अकादमिक उत्कृष्टता के लिए उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया।

समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, जेएसएस एएचईआर के कुलाधिपति परम पावन जगद्गुरु श्री शिवरात्रि देशिकेंद्र महास्वामीजी और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शिवराज वी. पाटिल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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