नर्सिंग कॉलेज की मान्यता व संबध्दता संबंधित ओरिजनल फाइल हाईकोर्ट में पेश

हाईकोर्ट ने दिये याचिकाकर्ता को परीक्षण के निर्देश

जबलपुर: फर्जी नर्सिंग कॉलेज की मान्यता व संबद्धता संबंधित ओरिजनल फाईल हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी तथा जस्टिस ए के पालीवाल की युगलपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गयी। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया है कि 15 दिनों में ओरिजनल फाइल का परीक्षण कर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 4 अप्रैल को निर्धारित की गयी है।

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि तत्कालीन अधिकारियों द्वारा मान्यता नियम 2018 में 3 बार संशोधन किए गये थे। जिसके कारण अपात्र कॉलेजों को भी निरंतर लाभ पहुँचाया गया।

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया कि मध्य प्रदेश नर्सिंग शिक्षण संस्था मान्यता नियम 2018 के बनने के बाद उन नियमों में किये गये सभी संशोधनों की मूल फाइल पेश करने के आदेश जारी किये गये थे। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि तत्कालीन अधिकारियों द्वारा मान्यता नियम 2018 में 3 बार संशोधन किए गये थे। जिसके कारण अपात्र कॉलेजों को भी निरंतर लाभ पहुँचाया गये। इसके अलावा मेडिकल यूनिवर्सिटी सहित नर्सिंग काउंसिल के द्वारा सभी अनसुटेबल नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता से जुड़ी मूल फाइलें पेश करने आदेश भी हाईकोर्ट ने जारी किये थे।

याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से मान्यता और संबद्धता संबंधित ओरिजनल फाईल प्रस्तुत की गयी। युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ओरिजिनल फाइल का अवलोकन करने शासकीय अधिवक्ता के साथ मिलकर स्थान व समय निर्धारित करें।याचिकाकर्ता की तरफ से सुनवाई के दौरान बताया गया कि सीबीआई जांच के दौरान कॉलेजों ने छात्रों को प्रवेश देने से इंकार कर दिया था।

सीबीआई की जांच में भी उन कॉलेजों में छात्रों का एडमिशन नहीं होने बताया गया था। ऐसे कॉलेजों ने बाद में बाद में बैक डेट पर एडमिशन दर्शाते हुए छात्रों के एनरोलमेंट नंबर के लिए आवेदन किया है। युगलपीठ ने पूर्व में पारित आदेश को संशोधित करते हुए कहा है कि छात्रों के एनरोलमेंट सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर किये गये। इसके अलावा एक माह की अवधि में अनसूटेबल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों का ट्रांसफर सूटेबल कॉलेज में किया जाये।

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