
प्रवेश कुमार मिश्र नई दिल्ली। मानसून सत्र से ठीक पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जिस तरह के तीखे तेवर व राजनीतिक कड़वाहट दिखी , उससे साफ है कि विपक्षी समूह सरकार को घेरने में कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं है.
19 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में जहां एक तरफ केंद्र सरकार कुल सात महत्वपूर्ण विधेयकों पांच नए व दो लंबित को पारित कराने की तैयारी में है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी समूह भी देश के पांच जीवंत मुद्दों पर बहस के सहारे सरकार को घेरने की तैयारी में है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 40 राजनीतिक दलों के 58 वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
बैठक की शुरुआत में ही विपक्षी दलों ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के गुट नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया को आमंत्रित करने पर कड़ा विरोध जताते हुए सांकेतिक बहिष्कार किया. हालांकि, विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्ष के नेता पुनः चर्चा में शामिल हुए.
विपक्षी इंडिया समूह ने इस सत्र में सरकार को चौतरफा घेरने के लिए बेहद आक्रामक और ठोस रणनीति तैयार की है. विपक्षी दल चाहते हैं कि सरकार नीट पेपर लीक घोटाला, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी, सोनम वांगचुक का अनशन, राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में आपरेशन सिन्दूर पर चर्चा तथा आर्थिक चुनौतियों व महंगाई पर विशेष चर्चा कराएं. जबकि सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026 वंदे मातरम, आयकर संशोधन विधेयक,2026, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 33 से 37 करने वाला संशोधन विधेयक 2026, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक,2026, एमएसएमई विकास संशोधन विधेयक 2026, जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 को पास कराने की तैयारी में है. हालांकि सरकार ने इस सत्र के एजेंडे से सबसे विवादित विषयों जैसे 130वें और 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक ( परिसीमन और सार्वजनिक पद से हटाने) को फिलहाल बाहर रखा है, ताकि विधायी कामकाज बिना किसी बड़े संवैधानिक गतिरोध के आगे बढ़ सके. यानी उक्त दोनों महत्वाकांक्षी विधेयकों को सत्र के अंत में लाया जा सकता है.
बैठक के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने स्पष्ट किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे बच्चों के भविष्य से जुड़ा है इसलिए सरकार को इस विषय पर विस्तार से चर्चा करना होगा. इतना ही नहीं इस बार कांग्रेस पार्टी ने एक तकनीकी और आर्थिक मुद्दा उठाने की रणनीति बनाई है. पेट्रोल में 20 फीसदी एथिल अल्कोहल (ई-20) के मिश्रण की नीति पर विपक्ष का दावा है कि इस नीति के कारण पुराने वाहनों के इंजनों पर बुरा असर पड़ रहा है और ऑटोमोबाइल सेक्टर व आम उपभोक्ताओं पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. राम मंदिर चढ़ाव चोरी को आस्था और विश्वास पर हमला बताते हुए सपा नेताओं ने कहा कि सरकार को इस विषय पर खुलकर पक्ष रखना होगा. इतना ही नहीं 16 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और भारत की जवाबी सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा की मांग की है.
सूत्रों कि माने तो गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इस सत्र के शुरुआत में ही राज्यसभा में वंदे मातरम से संबंधित एक महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाने की रणनीति बनाई गई है. हालांकि उक्त विधेयक इस सत्र का सबसे बड़ा आरंभिक विवाद बन सकता है. क्योंकि इसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन में व्यवधान डालने को कानूनी रूप से दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान है. विपक्ष इसे सरकार का राष्ट्रवाद बनाम अन्य का राजनीतिक नैरेटिव सेट करने का प्रयास मान रहा है, जिससे सदन में तीखी वैचारिक बहस होना तय है. सूत्रों की माने तो नीट परीक्षा विवाद पर विपक्ष के भारी हंगामे को शांत करने के लिए केंद्र सरकार ने बचाव के बजाय आक्रामक होने की रणनीति बनाई है. सरकार सदन में उन सभी राज्यों (विशेषकर विपक्ष शासित राज्यों) में पूर्व में हुए पेपर लीक के आंकड़े और उनके खिलाफ की गई केंद्रीय एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करेगी, ताकि यह साबित किया जा सके कि सरकार पारदर्शिता के प्रति गंभीर है.
