‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य तक पहंचने में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की होगी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका: सचिव

नई दिल्ली, 30 जून (वार्ता) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) मंत्रालय के सचिव भरत खेड़ा ने पिछले तीन वर्ष इस क्षेत्र में उद्यमों के पंजीकरण की तेज गति का उल्लेख करते हुए मंगलवार को कहा कि यह क्षेत्र ‘विकसित भारत-2047 ‘ के लक्ष्य में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाला है। वह यहां उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित एमएसएमई समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए विकसित किए गए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उद्यम पंजीकरण पाँच गुना बढ़कर 8.8 करोड़ से अधिक हो गए हैं। श्री खेड़ा ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग एक-तिहाई योगदान दे रहा है,और कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र से होता है। यह कृषि के बाद रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा, ” ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में एमएसएमई क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

आर्थिक परिवर्तन का अगला चरण ऐसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के निर्माण पर निर्भर करेगा, जो अधिक उत्पादक, नवाचार-आधारित, प्रौद्योगिकी-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हों। यह बात भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री भरत खेड़ा ने आज नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई एमएसएमई राइज समिट के उद्घाटन अवसर पर कही।

एमएसएमई सचिव ने कहा कि इस क्षेत्र को वर्ष 2014 में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का संस्थागत ऋण मिला था जो अब बढ़कर करीब 37 लाख करोड़ रुपये हो चुका है, जबकि क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के ऋण की गारंटी प्रदान की गई है। उन्होंने 53 प्रौद्योगिकी केंद्र, एमएसएमई चैंपियंस कार्यक्रम, वसूली के बिलों पर उधार की (ट्रेड रिसीवेवल डिस्काउंटिग प्रणाली) सुविधा, आत्मनिर्भर भारत फंड, डिजिटल कॉमर्स और सार्वजनिक खरीद प्लेटफॉर्म के माध्यम से विस्तारित बाजार पहुंच जैसी पहलों का भी उल्लेख किया, जो एमएसएमई को टिकाऊ विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बना रही हैं।

सचिव ने एमएसएमई से डिजिटलीकरण, इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नवाचार का अधिकतम उपयोग कर अपनी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का आह्वान किया।

इस कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने एमएसएमई से वित्त, अवसंरचना, उद्यमिता और कौशल विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने तथा उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार ने एमएसएमई से अपनी डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करने और जेम के संपूर्ण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के उप प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार ने कहा कि अनौपचारिक उद्यमों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने पर उन्हें सरकारी योजनाओं और संस्थागत वित्त का अधिक लाभ मिल सकेगा।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्कर्ष गोस्वामी ने कहा कि ओएनडीसी, आधार और यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म एमएसएमई के लिए बाजार तक पहुंच की लागत कम कर रहे हैं, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी भागीदारी का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

सीआईआई राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के अध्यक्ष एवं राजरतन ग्लोबल वायर लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुनील चोरड़िया ने कहा कि भारतीय एमएसएमई की भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता पाँच प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी— नीति समर्थन एवं कारोबार सुगमता, वित्त एवं ऋण तथा जोखिम प्रबंधन, उत्पादकता, घरेलू मांग एवं वैश्विक बाजार तक पहुंच, तथा स्थिरता, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार एवं क्षमता निर्माण।

सीआईआई राष्ट्रीय एमएसएमई परिषद के सस्टेनेबिलिटी एवं सीबीएएम रेडीनेस के अध्यक्ष तथा सोमानी सेरामिक्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीकांत सोमानी ने मजबूत औद्योगिक क्लस्टरों, ओईएम-एमएसएमई साझेदारी को बढ़ावा देने, केंद्र और राज्यों में नीतियों के समन्वित क्रियान्वयन तथा स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए साझा अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

 

 

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