आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पूर्व डीजी पिता पर भोपाल में कुक से मारपीट के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टीम पंजाब किंग्स से खेलने वाले क्रिकेटर शशांक सिंह विवादों से घिरते नजर आ रहे हैं। उन पर उनके कुक ने जबरन काम करवाने और मारपीट करने का आरोप लगाया है। इसमें उनके पिता, पुलिस के रिटायर्ड स्पेशल डायरेक्टर जनरल (डीजी) शैलेश सिंह का नाम भी शामिल है। भोपाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रही है।
29 जून को इस मामले में भोपाल के रातीबड़ में FIR दर्ज हुई है। जिसमें कुक ने अच्छा खाना न बनाने पर मारपीट, गाली-गलौज और जबरदस्ती मोबाइल छीनने का आरोप लगाया। FIR में शैलेश सिंह, शशांक सिंह और उनके ड्राइवर (जिसकी पहचान मिश्रा के तौर पर हुई है) को आरोपी बनाया गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
सरकारी नौकरी दिलाने का किया था वादा
रीवा जिले के रहने वाले शिकायतकर्ता विपेंद्र सिंह तोमर ने 25 जून को नीलबाद स्थित परिवार के बंगले में कुक के तौर पर काम शुरू किया था। विपेंद्र का आरोप है कि उन्हें खाने-पीने और रहने की सुविधा के साथ 15,000 रुपए महीने की सैलरी देने का वादा किया गया था। साथ ही सरकारी नौकरी दिलाने में मदद करने का वादा किया गया था।
पीड़ित ने अपनी लिखित शिकायत में कहा, सैलरी, खाने और रहने की सुविधा का भरोसा मिलने के बाद मैं वहां काम करने के लिए तैयार हो गया और उनके घर पर ही रहने लगा। तोमर ने आरोप लगाया कि बाद में उनसे कहा गया कि उनके काम में कमियां हैं और उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया। उन्होंने पुलिस को बताया, 28 जून को नाश्ता बनाने के बाद मैंने शैलेश सिंह से अपना मोबाइल फोन वापस मांगा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इससे परेशान होकर उसने खुद को अपने कमरे में बंद कर लिया था।
कमरे में घूस मार-पीट का आरोप
विपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि शैलेश सिंह, शशांक सिंह और उनके ड्राइवर मेरे कमरे में आए, मुझे अपशब्द कहे और हाथों व घूंसों से मारपीट करने लगे। मुझे पीटने के बाद, उन्होंने मुझे जबरदस्ती घर से बाहर निकाल दिया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने उनके मोबाइल फोन से 1,000 रुपए ट्रांसफर किए, यह कहते हुए कि यह खाने और रहने के खर्च के लिए थे। तोमर ने अपने बयान में कहा, घटना के बाद, मैं शिकायत दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई की मांग करने के लिए अपने रिश्तेदारों के साथ पुलिस स्टेशन आया। भोपाल पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।
