तेहरान/मस्कट, 29 जून (वार्ता) ईरान और ओमान ने नौवहन मार्ग, टोल टैक्स और रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर जारी विवादों के बीच भविष्य के प्रबंधन को लेकर पहली बार बैठक की। इस जलमार्ग पर दोनों देश अपनी संप्रभुता का दावा करते हैं।
ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मस्कट यात्रा के दौरान संयुक्त होर्मुज समिति की पहली बैठक हुई।” उन्होंने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बैठक किस तारीख को हुई।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “इस जलडमरूमध्य से जुड़े मौजूदा मुद्दों की समीक्षा करने के साथ ही हमने इसके भविष्य के प्रबंधन पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गुजरता है। इसके भविष्य का प्रशासन अब अमेरिका-ईरान के बीच विवाद का बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है।
ईरान ने बार-बार संकेत दिया है कि वह इस जलडमरूमध्य का उपयोग करने वाले जहाजों पर सेवा शुल्क लगा सकता है। उसका तर्क है कि तटीय देशों को इसके प्रबंधन पर संप्रभु अधिकार प्राप्त हैं। अमेरिका ने इस विचार को लगातार खारिज किया है और उसका रुख है कि यह जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, इसलिए इसे पूरी तरह से खुला और पारगमन शुल्क से मुक्त रहना चाहिए।
ओमान ने इस मामले पर मिला-जुला रुख अपनाया है। अभी पिछले हफ्ते ही ओमान-ईरान ने संयुक्त बयान जारी कर संकेत दिया था कि वे इस जलडमरूमध्य के प्रबंधन से जुड़ी लागतों की समीक्षा कर रहे हैं।
बाद में उसने कहा कि किसी भी ‘पारगमन शुल्क’ की योजना नहीं है और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के समन्वय से एक ‘अस्थायी समुद्री गलियारा’ खोला जायेगा।
इस पर ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एकमात्र स्वीकृत नौवहन मार्ग वही गलियारा है, जो ईरान तट के करीब से गुजरता है। इसके साथ ही उसने जहाजों को ईरानी अधिकारियों के अनुमोदित न किये गये वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने के खिलाफ चेतावनी दी।
अमेरिका-ईरान समझौता पत्र के तहत, ईरान-ओमान के लिए अन्य खाड़ी देशों के समन्वय से और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इस जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन तथा समुद्री सेवाओं पर परामर्श करना आवश्यक है। यह समझौता इसके हस्ताक्षर के बाद शुरुआती 60 दिनों की अवधि के लिए होर्मुज से टोल-मुक्त आवाजाही की गारंटी भी देता है।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत जारी रहने की उम्मीद है और सप्ताहांत में एक-दूसरे पर किये गये हमलों के बाद अमेरिका-ईरान दोनों अपने कदम पीछे खींचेंगे। जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य में स्वतंत्र रूप से आवाजाही की अनुमति होगी और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें कतर में बैठक करने वाली हैं।
वहीं ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, देश के उप विदेश मंत्री ने आज स्पष्ट किया कि “इस सप्ताह कार्य समूहों की कोई तकनीकी बैठक प्रस्तावित नहीं है।”
ओमान-ईरान ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब 14 सूत्रीय समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान-अमेरिका के बीच लगातार चार दिनों तक गोलीबारी हुई थी।
ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम घरीबाबादी के अनुसार, यह बैठक उनकी आधिकारिक यात्रा के दौरान मस्कट में हुई। बैठक में ओमान के विदेश राज्य मंत्री अब्दुलअजीज अल-हिनाई के साथ चर्चा शामिल थी। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के तात्कालिक समुद्री घटनाक्रमों के साथ-साथ इसके प्रबंधन ढांचे से जुड़े दीर्घकालिक सवालों पर भी चर्चा की गयी।
इस वार्ता का उद्देश्य परिचालन संबंधी चिंताओं को दूर करना है और साथ ही भविष्य के प्रबंधन के प्रबंधों के सिद्धांतों का प्रारूप तैयार करना है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, श्री गरीबाबादी ने कहा कि यह बातचीत ‘तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप आयोजित की गयी थी। उन्होंने क्षेत्रीय हितधारकों से जुड़ी मौजूदा राजनयिक समझ का भी हवाला दिया। यह बैठक 22 जून को जारी संयुक्त बयान के बाद हुई है। यह बयान ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मस्कट दौरे के बाद आया था। इसमें दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया था कि इस जलडमरूमध्य से जुड़ा कोई भी प्रबंध तटीय राज्यों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का सम्मान करने वाला होना चाहिए।
ईरान लगातार दावा करता रहा है कि इस जलडमरूमध्य से संबंधित किसी भी व्यवस्था में शामिल तटीय राज्यों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके अलावा,हाल के हमलों के बाद बढ़ती क्षेत्रीय ताकतों और तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सभी पक्षों से होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने से बचने का आह्वान किया है।
बगदाद में अपने इराकी समकक्ष के साथ संवाददाता सम्मेलन में श्री अराघची ने चेतावनी दी,”इस जलमार्ग पर वैकल्पिक व्यवस्था थोपने का कोई भी प्रयास स्थिति को और खराब करेगा। इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और स्थिर करने के प्रयासों में देरी होगी।”
क्षेत्र में हाल ही में हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों से ‘केवल परिस्थितियां अधिक जटिल होंगी’और तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने सभी पक्षों से ‘मौजूदा समझौता ज्ञापन का पालन करने और इसे पटरी से उतरने से रोकने’ का भी आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लगातार बढ़ता तनाव पश्चिम एशिया में संघर्ष को कम करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को कमजोर करेगा।
बातचीत को बढ़ावा देने में ओमान की भूमिका क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में उसकी पुरानी स्थिति के अनुरूप है। यह देश अक्सर ईरान और अन्य क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय पक्षों के बीच एक राजनयिक सेतु के रूप में काम करता रहा है, जिसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े अत्यधिक तनाव के दौर भी शामिल हैं।
