जम्मू, 16 अप्रैल (वार्ता) आगामी तीन जुलाई से शुरू होने वाले पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए पंजीकरण के पहले दिन गुरुवार को 19,402 तीर्थयात्रियों ने अपना पंजीयन कराया।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने गुरुवार को यहां श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की एक उच्चस्तरीय बैठक में आगामी 57 दिनों तक चलने वाली श्री अमरनाथ यात्रा की समीक्षा की। बैठक में नागरिक प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त होने वाली श्री अमरनाथजी यात्रा के सुचारू, सुरक्षित और सफल संचालन के लिये किये जा रहे व्यापक प्रबंधों की समीक्षा की गयी।
मुख्य सचिव ने सभी क्षेत्रों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ-साथ बालटाल और चंदनवाड़ी के माध्यम से पवित्र गुफा तक जाने वाले दो मुख्य मार्गों पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या में संभावित वृद्धि पर जोर देते हुये, उन्होंने संबंधित सभी विभागों को बुनियादी ढांचे और सेवाओं को बढ़ाने के निर्देश दिये। उपराज्यपाल के प्रधान सचिव और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मनदीप के. भंडारी ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें पंजीकरण प्रक्रिया, सेवा प्रदाता व्यवस्था, यात्रा शिविरों की स्थापना, लंगर सेवा और आवश्यक सुविधाओं के प्रावधान जैसे यात्रा के प्रमुख पहलुओं को रेखांकित किया गया।
उन्होंने बताया कि यात्रा के लिये पंजीकरण 15 अप्रैल से बैंक शाखाओं और इंटरनेट के माध्यम से शुरू हो गया है, जिसमें पहले ही दिन 19,402 तीर्थयात्रियों ने अपना पंजीकरण कराया है। प्रथम पूजा 29 जून को आयोजित की जानी है।
मुख्य सचिव ने सीमा सड़क संगठन (बी.आर.ओ.) को 15 मई, 2026 तक यात्रा के सभी मार्गों से समय पर बर्फ हटाने का कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यात्रा मार्गों पर सड़कों के उचित रखरखाव, सूचना पट्ट और सुरक्षा रेलिंग लगाने, ढलानों के स्थिरीकरण, पुलों के रखरखाव और यात्री विश्राम स्थलों की मरम्मत की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मुख्य सचिव ने सभी सरकारी विभागों के बीच समन्वित प्रयासों के महत्व को दोहराया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सभी व्यवस्थाएं समय से काफी पहले पूरी कर ली जायें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्य उद्देश्य तीर्थयात्रियों को एक सुरक्षित, आरामदायक और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा प्रदान करना है, जिससे यात्रा का सफल और सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।
