
नीमच। बस स्टैंड पर एक चाय विक्रेता महिला ने लाखों रुपए के गहनों से भरा बैग असली मालिक को लौटाकर ईमानदारी की मिसाल पेश की है। महिला की सजगता के कारण एक परिवार की मायरे (भात) के लिए ले जाई जा रही खुशियां और लाखों की ज्वेलरी सुरक्षित बच गईं।
अजमेर, राजस्थान के हियालिया निवासी लादुराम गुर्जर अपनी बहन के यहां गांधी सागर में मायरा लेकर जा रहे थे। वे 13 परिजनों के साथ अजमेर से ट्रेन द्वारा नीमच पहुंचे। सुबह लगभग 5 बजे वे नीमच बस स्टैंड आए और 5:30 बजे गांधी सागर के लिए बस में सवार हुए। इस दौरान बस स्टैंड पर चाय पीते समय वे जल्दबाजी में गहनों से भरा अपना बैग वहीं भूल गए।
लावारिस बैग पड़ा देख सुरक्षित रखा
गांधी सागर पहुंचने पर लादुराम को गहनों वाला बैग गायब होने का पता चला। उन्होंने तुरंत नीमच में अपने रिश्तेदारों को फोन कर बस स्टैंड भेजा, लेकिन शुरुआती खोज में बैग नहीं मिला। दरअसल, बस स्टैंड पर चाय का ठेला लगाने वाली बामन बर्डी निवासी रेखा नायक सुबह 8 बजे अपना ठेला बंद कर घर जा चुकी थीं। जब लादुराम के रिश्तेदारों ने आसपास पूछताछ की और रेखा नायक से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, तो रेखा ने बताया कि उनके ठेले से लगभग 10 फीट दूर एक लावारिस बैग पड़ा था, जिसे उन्होंने सुरक्षित रख लिया है।
दोपहर करीब 12 बजे लादुराम और उनके पुत्र गांधी सागर से वापस नीमच पहुंचे। इसके बाद कैंट थाने में पुलिस की मौजूदगी में चाय विक्रेता रेखा नायक ने गहनों से भरा बैग उसके असली मालिक लादुराम गुर्जर को सौंप दिया।
चाय वाले ने बैग लौटाया
लादुराम गुर्जर ने बताया बैग में मेरी पत्नी और बहन के मायरे की रकम रखी थी। इसमें दो नथ, दो रखड़ी, दो कूंचा और दो मांदलिया सहित कुल 5 तोला सोना था। इसके साथ ही करीब आधा किलो चांदी की ज्वेलरी भी रखी थी। अगर यह बैग नहीं मिलता तो हम कहीं के नहीं रहते। ‘
ईमानदारी की मिसाल पेश करने वाली रेखा नायक के पुत्र अशोक नायक ने बताया कि यह बैग सुबह करीब 5 बजे से ही वहां पड़ा हुआ था। सुबह 7 बजे तक जब किसी ने उसे नहीं उठाया, तो उनकी मां ने सुरक्षा के लिहाज से बैग को अपने ठेले के अंदर रख दिया।
अशोक ने बताया कि उन्होंने बैग को खोलकर भी नहीं देखा था। उन्हें बैग में कीमती ज्वेलरी होने की जानकारी भी तब लगी, जब पीडि़त परिवार का फोन आया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने रेखा नायक के इस सराहनीय कार्य की जमकर तारीफ की है।
