दलगत राजनीति से ऊपर उठकर करना होगा विकास: नीतू परमार

मुलताई। नगर में मां तापी नदी के संबंध में तीर्थ स्थान एवं तापी लोक की चर्चाओं का दौर जारी है। सभी पार्टियां अपने-अपने अनुसार मां ताप्ती लोक अथवा ताप्ती विकास प्राधिकरण के संबंध में दावे ठोकती नजर आ रही है तो वहीं एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। तापी नदी न्यास एवं प्रस्तावित तापी मंदिर/तापी विकास न्यास के संबंध में तथ्यात्मक स्पष्टीकरण हाल के समय में तापी नदी न्यास तथा वर्तमान में प्रस्तावित तापी मंदिर न्यास अथवा तापी विकास संबंधी घोषणाओं को लेकर अनेक प्रकार की चर्चाएँ हो रही हैं। इसके संबंध में वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार द्वारा एक प्रेस नोट जारी कर बताया कि कमलनाथ शासनकाल में चार नदियों के लिए अलग-अलग न्यासों का गठन किया गया था-तापी नदी न्यास, मंदाकिनी नदी न्यास, शिप्रा नदी न्यास तथा नर्मदा नदी न्यास। इन न्यासों के गठन के समय उनके कार्यक्षेत्र एवं उ‌द्देश्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था। यह स्पष्ट नहीं था कि ये न्यास नदी घाटों के विकास, नदी प्रवाह संरक्षण, धार्मिक एवं आध्यात्मिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण अथवा अन्य किस प्रकार के कार्य करेंगे।तापी नदी न्यास के अध्यक्ष के रूप में तत्कालीन कलेक्टर डी. एस. राय को नियुक्त किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में न तो कोई प्रभावी बैठक आयोजित हुई और न ही तापी नदी के विकास के लिए कोई उल्लेखनीय वित्तीय व्यय या कार्य सामने आया।वर्तमान में जिस तापी मंदिर न्यास अथवा मुलताई क्षेत्र के समग्र विकास की चर्चा की जा रही है, वह पूर्व में गठित तापी नदी न्यास से पूर्णतः अलग विषय है। दोनों संस्थाओं के उद्देश्य, कार्यक्षेत्र एवं स्वरूप अलग-अलग हैं। इन्हें एक ही बताकर जनता के बीच भ्रम उत्पन्न करना उचित नहीं है।विगत वर्षों में तापी लोक, तापी विकास प्राधिकरण तथा अन्य नामों से अनेक घोषणाएँ की गई, किन्तु आज भी माता तापी के पवित्र उद्‌गम स्थल का समग्र एवं योजनाबद्ध विकास अपेक्षित है। क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों से विनम्र आग्रह है कि वे अपने-अपने कार्यकाल में माता तापी, तापी उद्‌गम, नदी संरक्षण एवं क्षेत्रीय विकास के लिए किए गए कार्यों का तथ्यात्मक एवं सार्वजनिक विवरण प्रस्तुत करें, ताकि जनता वास्तविक स्थिति से अवगत हो सके।माता तापी का विषय किसी राजनीतिक मतभेद का नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति, पर्यावरण और विरासत के संरक्षण का विषय है। इसलिए इस विषय पर पारदर्शिता, तथ्य और सकारात्मक सहयोग की भावना से आगे बढ़ना ही जनहित में होगा।

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