जबलपुर: साहब.. अब हम करें तो क्या करें, जिम्मेदार विभाग खुद एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर काम से बचना चाह रहे हैं… ये उदासीनता ठीक नहीं है.. ये बातें इन दिनों भूकंप कॉलोनी के रहवासियों के खेमे में बीच जोरों पर चल रहीं हैं और अब वे कमिश्रर, कलेक्टर तक मामले की शिकायत करने की तैयारी में जुटे हुए हैं। दरअसल मामले में भूकंप कॉलोनी में पानी की निकासी के लिए नाली की खुदाई की गई थी और फिर उसके मलबे को वहीं पर छोड़ दिया गया। अब करीब 1 महीने होने जा रहे हैं और मलबा कीचड़ में तब्दील हो चुका है और आधी सड़क पर कब्जा जमा चुका है। ऐसे में स्थानीयजनों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है।
विदित हो कि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा भूकंप कॉलेानी में बारिश के समय जलप्लावन न हो इसके लिए पानी की निकासी के लिए जगह-जगह खुदाई की गई थी । खुदाई तो पूरी हो गई थी लेकिन खुदाई से निकले मलबे को जिम्मेदार उठाना भूल गए और अब लोगों के लिए ये मलबा परेशानी का सबब बना हुआ है। जानकारी के अनुसार हर वर्ष बारिश में भूकंप कॉलोनी, गंगानगर क्षेत्र में जलप्लावन बहुत होता है इसलिए निगम के स्वास्थ्य अमले द्वारा पानी की निकासी के लिए यहां खुदाई कार्य किया था।
15 फीट की सड़क बची 7 फीट
महाराणा प्रताप वार्ड के भूकंप कॉलोनी निवासी शुभम साहू, अमर सिंह ठाकुर, बलराज सिंह, भैरव बड़गैयां, वीरेंद्र शर्मा सहित अन्य ने नवभारत को बताया कि भूकंप कॉलोनी हनुमान मंदिर के पास 1 महीने से मलबा पड़ा हुआ है, कई बार संभागीय अधिकारी कृष्णकांत रावत, सीएसआई संतोष माहौर को शिकायत की गई कि मलबा उठाकर अलग कराएं लेकिन जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हुए अनदेखी कर रहे हैं और खामियाजा हम सभी को भुगतना पड़ रहा है। आलम ये है कि सड़क कुल 15 फीट की है तो मलबे के फैलने के कारण अब सड़क चलने के लिए महज 7 फीट ही बची है, ऐसे में जाम अलग लग रहा है और स्थानीय लोगों को इस मार्ग से होकर गुजरने में कीचड़ का सामना करते हुए परेशानियां उठानी पड़ रही है।
इस संबंध में स्थानीयजनों ने ये भी कहा कि जब वे मलबा हटाने पीडब्ल्यूडी विभाग के जिम्मेदारों से बोलते हैं तो उनका जवाब रहता है कि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने खुदाई की है आप उनसे शिकायत करिए और जब लोग स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार से मलबा हटाने कहते हैं तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी विभाग पर जिमेदारी डाल देते हैं। इस प्रकार दो विभागों के फेर में स्थानीयजन फंसते नजर आ रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच ये सवाल खड़ा हुआ है कि अब वे शिकायत करें तो किससे करे क्योंकि कोई सुनने वाला फिलहाल उन्हें नजर नहीं आ रहा है।
