लक्ष्मीकांत ढोके
पांढुरना: सदियों पुरानी परंपरा के तहत पांढुरना में शनिवार को विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला उत्साह और आस्था के साथ आयोजित किया गया। सुबह पूजा-अर्चना और झंडा गाड़ने की परंपरा पूरी होने के बाद करीब 10:25 बजे युवाओं ने पत्थरबाजी शुरू की। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक चले इस मेला युद्ध में दोनों पक्षों के बीच जोरदार गोटमार हुई, जिसमें 700 से अधिक लोग घायल हुए। इनमें से दो गंभीर घायलों को नागपुर रेफर करना पड़ा।
मेले में स्थानीय विधायक निलेश उइके भी पहुंचे और परंपरा निभाते हुए पत्थरबाजी में शामिल होकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। उनके साथ गोटमार खेलते देख दोनों पक्षों में उत्साह का माहौल बन गया।गोटमार देखने के लिए आसपास के जिलों सहित महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती, वरुड और सावनेर से हजारों लोग पहुंचे। नदी किनारे और मकानों की छतों से लोगों ने पत्थरबाजी का नजारा देखा। वहीं जिला कलेक्टर अजय देव शर्मा, एसपी सुंदर सिंह कनेश और एएसपी नीरज सोनी ने भी प्रशासनिक प्रबंधों के बीच मेले का निरीक्षण किया।
प्रशासन का कहना है कि 300 लोग घायल हुए हैं, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार संख्या 700 से अधिक है। देर शाम तक सावरगांव पक्ष झंडा बचाने में सफल रहा और पांढुरना पक्ष झंडा हासिल नहीं कर सका।
