अयोध्या | अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष सरकार पर पूरी तरह हावी हो गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने एसआईटी के गठन और रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि जब जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी, तो एसआईटी की जिम्मेदारियां ट्रस्ट को क्यों सौंपी गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘ढीले रवैये’ पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर सरकार किसे बचाने का प्रयास कर रही है।
केजरीवाल का कानूनी और प्रशासनिक प्रहार
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी मामले में कानूनी पेच फंसाते हुए एसआईटी के गठन को ही दिखावा करार दिया है। उन्होंने सीआरपीसी का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर के बिना एसआईटी का गठन नहीं हो सकता और इस टीम के पास जांच की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी चोरी प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना संभव नहीं थी और एसआईटी केवल बड़े नामों को बचाने के लिए बनाई गई एक औपचारिकता मात्र है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
इस विवाद ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। एक ओर जहां बीजेपी विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे बीजेपी के डर का नाम दिया है। इमरान मसूद ने कहा कि बीजेपी राहुल गांधी से भयभीत है क्योंकि उनकी वापसी से कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश होने का डर है। राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष का यह आक्रामक रुख राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

