
सौदान सिंह यादव गंजबासौदा। नगर के कई वार्डों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि गरीब एवं पिछड़े वर्गों की बस्तियों में न सड़कें बनी हैं, न नालियां. जहां निर्माण हुआ भी है, वहां नियमित सफाई नहीं होती. निर्माणाधीन मकानों का मलबा लंबे समय तक पड़ा रहता है, जिससे आवागमन में परेशानी होती है. सफाईकर्मियों का कहना है कि निर्माण मलबा उठाना उनकी जिम्मेदारी में नहीं आता.
वार्ड 3 नई बस्ती में रहवासी बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों से यहां कोई नया निर्माण कार्य नहीं हुआ. अधिकांश लोग अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के हैं. लोगों का आरोप है कि पिछड़ी बस्तियों के लिए अलग से बजट आवंटित होने के बावजूद काम नहीं कराए गए. वहीं, कुछ इलाकों में आवश्यकता न होते हुए भी सीमेंट कंक्रीट सड़कें दोबारा बनाई जा रही हैं.
पाराशरी नदी सौंदर्यीकरण अधूरा
पर्यावरण संस्था पंचतत्व द्वारा शुरू किया गया पाराशरी नदी कायाकल्प अभियान भी अधूरा पड़ा है. दो वर्ष पूर्व शुरू हुए चौड़ीकरण और गहरीकरण कार्य को बीच में ही रोक दिया गया, जिससे नदी का बहाव प्रभावित हुआ है. नागरिकों का कहना है कि अधूरे कार्य के कारण अब स्थिति और खराब हो गई है.
जलभराव और मच्छरों से परेशानी
वार्ड क्रमांक 3 नई बस्ती में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है. नालियों के अभाव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है. लोगों का कहना है कि नगर पालिका के अधिकारी निरीक्षण तो करते हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ.
नालों में गंदगी और दुर्गंध
रामनगर वार्ड क्रमांक 1 से निकलने वाले नाले में रुका हुआ पानी बदबू फैला रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले की सफाई लंबे समय से नहीं हुई, जिससे पानी सड़ गया है और मृत जीव-जंतुओं से स्थिति और बिगड़ रही है.
इस बारे में पूर्व विधायक निशंक जैन ने कहा कि नगर पालिका द्वारा विकास कार्यों का प्रचार तो खूब किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति संतोषजनक नहीं है. पिछड़ी बस्तियों में उपेक्षा की शिकायतें मिल रही हैं. पाराशरी नदी कायाकल्प अभियान के तहत अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिससे लोगों में निराशा है.
