
ग्वालियर। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अध्ययन एवं परीक्षण के लिये गठित उच्च स्तरीय समिति की जन परामर्श बैठक गुरुवार को बाल भवन के सभागार में दिनभर चली। बैठक में समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि देश में वर्तमान में दो दर्जन से अधिक ऐसे कानून हैं जिसमें एक ही प्रकार के मामलों में अलग-अलग प्रावधान लागू होते हैं। समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार उपलब्ध कराना है।
बाल भवन के सभागार में आयोजित जन परामर्श बैठक में उच्च स्तरीय कमेटी के अनूप नायर, बुधपाल सिंह, शोभा पेठणकर सहित विधायक भितरवार मोहन सिंह राठौर, विधायक ग्रामीण साहब सिंह गुर्जर, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन भदौरिया, ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक शर्मा, संत कृपाल सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, पूर्व मंत्री श्रीमती इमरती देवी, भाजपा ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत, कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
उच्च स्तरीय समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा ने कहा कि समान नागरिक संहिता के संबंध में जनता के विचार जानने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। नागरिकों के विचार जानने के लिये प्रदेश भर में लोगों से संवाद करने के उद्देश्य से बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रदेश भर में 10 लाख से अधिक लोगों ने समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का संबंध परिवार से जुड़े कानूनों जैसे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और परिवारिक अधिकारों से है। वर्तमान में देश में अधिकांश कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिये अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। इसी कारण समान परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।
समिति के सदस्यों ने बैठक में प्राप्त सुझावों को एकत्र कर उन पर विचार करने की बात कही।
