अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस एवं भू-स्वामियों के बीच हुई झड़प 

सीधी। जिले के बहरी थाना अंतर्गत बहेरा में रेलवे में अधिग्रहित जमीन का अतिक्रमण हटाने गए प्रशासनिक अमले के बीच भू-स्वामियों द्वारा मना करने के दौरान पुलिस एवं भू-स्वामियों के बीच झड़प हुई। इस दौरान थाना प्रभारी बहरी उत्तेजित होकर बोलने लगे तभी मामला और आग उगलने लगा। हालांकि कुछ मकान गिरने के बाद कार्रवाई रोंकने के लिए प्रशासन को मजबूर होना पड़ा। मालूम हो कि मुआवजा न मिलने को लेकर इस तरह की स्थितियां पहले भी निर्मित हो चुकी हैं। फिर रेलवे में अधिग्रहित जमीन को लेकर बहेरा में भी इसी तरह की वारदातें गत दिवस देखने को मिली जहां कि पुलिस एवं प्रशासनिक अमला दल-बल के साथ मकान गिराने बुल्डोजर के साथ गया था। वहीं भू-स्वामियों द्वारा इसका विरोध किया गया है। प्रशासन से ज्यादा बहरी थाना प्रभारी आग बबूला हो गए। इसी बीच तू-तू-मै-मै की स्थिति निर्मित हुई। इतना ही नहीं मामला और बढ़ता यह भांपते हुए कुछ मकानों को गिराने की कार्रवाई के बाद अंतत: प्रशासन को वापस लौटना पड़ा।

पहले मिले मुआवजा फिर गिरे मकान –

बहेरा के निवासी जिनकी जमीन एवं मकान रेलवे में फंसी है उनकी मांग है कि पहले हमें मुआवजा मिले इसके बाद भी मकान गिराने की कार्रवाई हो। वहीं बरसात के समय में मकान गिराना भी उचित नहीं है यह भी एक प्रमुख विषय को लेकर भू-स्वामी अड़े रहे। काफी संख्या में पुलिस अमले मौजूद थे। राजस्व विभाग के प्रशासनिक अमले एवं पुलिस के बीच झड़प हुई। कुछ मकानों में जैसे ही बुल्डोजर की कार्रवाई शुरू हुई तभी विवाद शुरू हो गया। अंतत: मकान गिराने की आधा-अधूरा कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमला वापस लौट गाए।

गजरही में भी इसी तरह हुआ था विवाद –

इसी तरह जिले के बहरी थाना क्षेत्र के ग्राम गजरही में रविवार दोपहर रेलवे विभाग ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर कई मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस पर भी विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। स्थानीय निवासी आशीष यादव ने आरोप लगाया कि उनके मकान सहित उनके परिवार के कुल छह मकानों को बिना किसी मुआवजे के तोड़ दिया गया। उन्होंने मुन्ना यादव और सुरेश यादव के मकानों का भी जिक्र किया। आशीष यादव के अनुसार, उन्होंने कई बार तहसील कार्यालय में आवेदन देकर मुआवजा और पुनर्वास की मांग की थी, लेकिन किसी अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी। इस मामले में संबंधित अधिकारियों ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

 

तहसीलदार एवं थाना प्रभारी जानकारी देने से कर रहे परहेज –

 

बहेरा में पुलिस एवं राजस्व अमले के साथ ग्रामीणों द्वारा की गई झड़प को लेकर जब तहसीलदार बहरी इंद्राज सिंह एवं थाना प्रभारी बहरी राजेश पाण्डेय से बात करना चाहा तो वह फोन उठाने से परहेज करते नजर आए। यहां तक कि आधे-आधे घंटे के अंतराल में तीन बार कोशिस की गई कि वह जानकारी दें लेकिन बाद में थाना प्रभारी मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए। वहीं तहसीलदार फोन उठाने से लगातार परहेज करते नजर आए।

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