सतना : सोमवती अमावस्या का पर्व सोमवार को पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही पवित्र नदियों के घाटों, प्रमुख मंदिरों और जलाशयों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सुहागिन महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया। महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए निराहार व्रत रखा। सुबह से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों व सार्वजनिक स्थानों पर स्थित पीपल के वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ जुटी रही।
महिलाओं ने पीपल की जड़ में जल, दूध, फूल और अक्षत अर्पित कर विधिवत पूजन किया। इसके बाद वृक्ष के चारों ओर सूत का धागा लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा की। कई स्थानों पर महिलाओं ने परिक्रमा के दौरान फल, बिंदी, चूड़ी और मिठाइयों की फेरी भी लगाई।
सोमवार को अमावस्या का संयोग बेहद दुर्लभ और महाफलदायी होता है। इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल अक्षय रहता है। इस पावन अवसर पर लोगों ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म भी किए।
ऐसी मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर पितरों को जल देने से वे तृप्त होते हैं और परिवार को पितृदोष से मुक्ति मिलती है। पर्व के मद्देनजर क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में बड़े पैमाने पर भंडारे और प्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
