सौसर: रामाकोना ग्राम पंचायत में बुधवार को उस समय गहमागहमी की स्थिति बन गई, जब पूर्व जनपद सदस्य सुमन पातुरकर और सामाजिक कार्यकर्ता दिनकर पातुरकर ने पंचायत की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गांव में व्याप्त गंदगी और अव्यवस्थाओं से नाराज पातुरकर परिवार अपने घर से कचरे से भरी चार बोरियां लेकर पंचायत प्रांगण पहुंचा और धरने पर बैठ गया।
सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान पातुरकर परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने पंचायत सचिव कमलाकर बोबडे की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है। कचरा गाड़ी केवल औपचारिकता के लिए थोड़ी देर घूमकर पंचायत मैदान में खड़ी हो जाती है। जब पातुरकर परिवार ने कचरे की बोरियां परिसर में रखकर अपना विरोध दर्ज कराया, तो वहां मौजूद अन्य ग्रामीणों ने भी पंचायत के प्रति अपना आक्रोश जाहिर किया।
सजा के तौर पर सचिव ने खुद उठाया कचरा
लगभग 30 मिनट तक चले इस घटनाक्रम के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा। अपनी नाराजगी जताते हुए दिनकर पातुरकर ने सचिव कमलाकर बोबडे से कहा कि वे स्वयं इस कचरे को उठाकर गाड़ी में डालें। ग्रामीणों के भारी दबाव और विरोध को देखते हुए सचिव ने खुद चार बोरी कचरा गाड़ी में डाला, जिसके बाद ही ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ।
अस्तित्व खोता एकनाथ षष्ठी मेला’
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने आगामी ‘एकनाथ षष्ठी मेले’ की बदहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष पंचायत द्वारा मेले के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। दिनकर पातुरकर ने नवभारत से चर्चा में बताया कि शासकीय मेले का दर्जा मिलने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।पंचायत की इसी लापरवाही के कारण ऐतिहासिक मेले का स्वरूप लगातार छोटा होता जा रहा है।
बहरहाल ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
