भदोही, 11 मार्च (वार्ता) ट्रम्प टैरिफ के बाद पश्चिम एशिया जारी युद्ध का व्यापक असर कालीन कारोबार पर देखा जा रहा है। जंग के कारण हार्मुज स्टेट बाधित होने से माल वाहक समुद्री जहाज जहां-तहां फंसे होने के कारण लगभग ढाई हजार करोड़ का कालीन रास्ते में फंसा हुआ है।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने बुधवार को यहां बताया कि अमेरिकी टैरिफ से उबरने के बाद कालीन उद्योग ने थोड़ी राहत की श्वास लिया ही था, कि खाड़ी में उथल-पुथल शुरू हो गया। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच खाड़ी देशों में इन दिनों बारूदी बवंडर उठा हुआ है, जिससे हार्मुज स्टेट से माल वाहक पोतों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से ठप हो गई है। युद्ध के कारण कालीनों के कंटेनर भरे जहाज रास्ते में जगह-जगह फंसे हुए हैं।
खाड़ी में मचे घमासान के कारण वैश्विक बाजार में व्यवसायिक अनिश्चितता जैसी स्थिति उत्पन्न होने के कारण वैसे भी निर्यात आर्डर लगभग शून्य जैसे स्टेज में पहुंच गया है। वहीं हार्मुज स्टेट से जहाजों का आवागमन अवरूद्ध होने ढाई हजार करोड़ से अधिक का कालीन रास्ते में फंसा हुआ है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 में कारपेट सिटी भदोही के कालीन मेगा मार्ट में संपन्न हुए कालीन एक्सपो में मिले निर्यात आर्डर की भरपाई में कालीन कारोबारी युद्ध स्तर पर जुटे थे। इसी बीच हार्मुज स्टेट का व्यवसाईक रूट बाधित होने से विदेशी बाजार में भेजा गया कालीन जगह-जगह डंप हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि युद्ध का दायरा बढ़ा अथवा लंबा खिंचा तो इसका असर आगामी माह अप्रैल 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 50वें अंतर्राष्ट्रीय कालीन मेले पर पड़ना तय है।
