नयी दिल्ली 15 जून (वार्ता) सरकार ने कहा है कि देश पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति से उत्पन्न किसी भी असर से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और उर्वरकों की उपलब्धता, पेट्रोलियम आपूर्ति तथा समुद्री संचालन स्थिर बने हुए हैं।
सरकार ने कहा है कि वह घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखी जा रही है।
रसायन और उर्वरक , पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा नौवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को यहां अंतर मंत्रालयी ब्रीफिंग में आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
उर्वरक विभाग ने कहा कि खरीफ 2026 मौसम से पहले देश में उर्वरकों का भंडार पर्याप्त स्तर पर है। मंत्रालय में संयुक्त सचिव वंदना ने बताया कि मौसम के लिए उर्वरकों की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन 383.9 लाख टन है, जिसके मुकाबले अभी 196.65 लाख टन भंडार उपलब्ध है, जो मौसमी आवश्यकता का लगभग 51 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि किसान अब तक 102.78 टन रासायनिक उर्वरक खरीद चुके हैं, जो कुल आवश्यकता का लगभग 27 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, देश में 22.60 लाख टन जैविक खाद उपलब्ध है, जबकि इसकी बिक्री अब तक 11.82 लाख टन तक पहुँच चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 3.31 लाख टन थी। इससे जैविक पोषक स्रोतों के बढ़ते उपयोग का संकेत मिलता है।
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से देश में 123.65 लाख टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन किया गया है तथा 39.36 लाख टन आयात किया गया है, जिससे कुल अतिरिक्त उपलब्धता 163.01 लाख टन हो गई है। भारत ने ओमान, रूस, मोरक्को, मिस्र, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित कई देशों से 50 लाख टन से अधिक यूरिया तथा फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर ली है।
विभाग ने कहा कि 17 लाख टन यूरिया की खरीद के लिए वैश्विक निविदा प्रक्रिया जारी है और उर्वरक सब्सिडी का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है। विभाग ने कहा कि वर्तमान खरीफ मौसम के दौरान किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।
नौवहन मंत्रालय ने बताया कि भारतीय नौवहन निगम के नेतृत्व वाले एक समूह द्वारा संचालित एलएनजी वाहक पोत “दिशा” 62,370 टन एलएनजी लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुका है और उसके 18 जून को भारत पहुँचने की उम्मीद है।
अधिकारियों ने कहा कि अब तक भारत के ध्वज वाले 10 और विदेशी ध्वज वाले 5 पोत सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। भारत के ध्वज वाले 13 पोत और लगभग 325 भारतीय नाविक जलडमरूमध्य के पश्चिम में स्थित फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में अब भी मौजूद हैं।
मंत्रालय ने बताया कि व्यापक खाड़ी क्षेत्र में संचालित पोतों पर लगभग 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं।
हाल के दिनों में एक घटना में कथित रूप से शामिल हांगकांग के ध्वज वाले एक टैंकर पर भारतीय चालक दल के सदस्यों की उपस्थिति संबंधी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पोत पर मौजूद सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
नौवहन महानिदेशालय ने भी नौवहन कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को संघर्ष-प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में संचालन के दौरान अधिक सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है।
इस बीच, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि देश में ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। अधिकारियों ने कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी वितरण, पीएनजी विस्तार तथा रासायनिक, औषधि और पेंट उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी है।
मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) मूल्य स्थिरीकरण योजना पर हितधारकों के साथ परामर्श अंतिम चरण में है और इसके दिशा-निर्देश शीघ्र जारी किए जाने की संभावना है।
फ्लेक्स-फ्यूल अवसंरचना के विस्तार पर जानकारी देते हुए अधिकारियों ने कहा कि दिसंबर 2026 तक लगभग 500 खुदरा केंद्रों और दिसंबर 2027 तक 5,000 केंद्रों पर एथेनॉल-मिश्रित ईंधन उपलब्ध होगा।
ईंधन मूल्य निर्धारण के संबंध में मंत्रालय ने संकेत दिया कि अभी प्रति घरेलू एलपीजी सिलेंडर लगभग 700 रुपये, पेट्रोल पर लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तथा डीज़ल पर लगभग 27 रुपये प्रति लीटर घाटे की स्थिति बनी हुई है।
