इंदौर:शनिवार को अभ्यास मंडल की कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन अभियान समिति सदस्यों ने क्षेत्रीय पार्षद के साथ निरीक्षण किया. इस दौरान योजना के क्रियान्वयन संस्था का तकनीकी दल भी मौजूद था. दौरे में अभ्यास मंडल के सदस्यों को बताया गया कि 12 मीटर रिवर फ्रंट विकसित कर सौंदर्यीकरण और नदी को 25 मीटर चौड़ा एवं लगभग 3 मीटर गहरा बनाया जाएगा. गंदे नालों की टैपिंग कर सीवेज पानी की अलग निकासी होगी.
आज अभ्यास मंडल कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन अभियान समिति सदस्यों ने पार्षद सुरेश टाकलकर को दो दिन पहले तीन सदस्यीय समिति द्वारा बनाई रिपोर्ट बताई. समिति द्वारा बताया गया कि किस तरह लोखंडे ब्रिज से अहिल्या आश्रम पुल तक गंदगी, ड्रेनेज पानी, पेड़ों की अवैध कटाई हो रही है. निरीक्षण के दौरान पार्षद ने कहा कि 1200 मीटर क्षेत्र में रिवर फ्रंट का सौंदर्यीकरण और नदी 25 मीटर चौड़ी एवं करीब 3 मीटर गहरी की जाएगी. नदी के दोनों किनारों को गैबियन संरचना मजबूत करने, क्षेत्र में लैंडस्केपिंग एवं वृक्षारोपण किया जाएगा. हरसिद्धि एसटीपी से उपचारित जल लाकर नदी में प्रवाहित करने की योजना है. इस अवसर डॉ माला सिंह ठाकुर, वैशाली खरे, प्रणीता दीक्षित, उदय बापट, श्रीकांत धर्माधिकारी, सुशील पटेल सहित क्षेत्र के नागरिक उपस्थित थे.
विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण सुझाव
– पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी. जोशी ने कहा कि किसी भी नदी सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी, जल गुणवत्ता, जैव विविधता एवं भूजल पुनर्भरण की पुनर्स्थापना होना चाहिए.
– अभ्यास मंडल अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने कहा कि परियोजना के दीर्घकालीन लाभ और लागत का सार्वजनिक मूल्यांकन होना जरूरी हैं.
– पर्यावरणविद् डॉ. दिलीप वागेला ने कहा कि उपचारित जल का उपयोग नदी पुनर्जीवन में किया जा सकता है, किंतु जल गुणवत्ता की निगरानी और पर्यावरणीय मानकों का कठोर पालन आवश्यक है.
– पूर्व अभियंता नूर मोहम्मद कुरैशी ने नदी किनारे स्थित अतिक्रमणों के निराकरण की अनिवार्यता बताई. साथ ही नदी सीमांकन तुरंत होना चाहिए.
– स्थानीय रहवासी अनिल बोरगांवकर, सुनील बेनवंशी ने निरक्षण भ्रमण उपयोगी बताते हुए योजना में पूर्ण सहयोग करने सहमति दी
