न्यूयार्क, 12 जून (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ‘हेट स्पीच’ को शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए इस पर लगाम लगाने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है।
महासचिव न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में गुरुवार ‘मस्कट प्लान ऑफ एक्शन’ की शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे। यह एक ऐसी पहल है जो शांति को बढ़ावा देने और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने में पारंपरिक और मूल निवासियों की भूमिका पर जोर देती है। उन्होंने कहा कि नफरत भरे बयान समुदायों को बांटते हैं, पूरे समूह के प्रति इंसानियत को खत्म करते हैं और हिंसा का रास्ता तैयार करते हैं। यह जानबूझकर किया जाता है और यह हर नरसंहार या बड़े अपराध का मुख्य हिस्सा होता है।
श्री गुटेरेस ने कहा कि इस खतरनाक स्थिति को रोकने के लिए शिक्षा बढ़ानी होगी, पीड़ितों की मदद करनी होगी और सरकारों व टेक कंपनियों को सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही, स्थानीय नेताओं की भागीदारी भी जरूरी है, क्योंकि वे लोगों को अच्छी तरह समझते हैं और उन पर भरोसा किया जाता है। उनका असर समय रहते तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
महासचिव ने इस बात पर चिंता जताई कि बिना नियमों के चल रहे सोशल मीडिया मंचों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने से नफरत भरे बयान अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं। हालांकि नरसंहार और अपराधों को रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकारों की है, लेकिन इसमें पूरे समाज को अपनी भूमिका निभानी होगी।
श्री गुटेरेस ने सदस्य देशों के लिए चार मुख्य बिंदु रेखांकित किए। पहला, डिजिटल मंचों की जवाबदेही तय की जाए और ऑनलाइन सेवाओं में ‘यूजर की सुरक्षा सुनिश्चित हो’। दूसरा, स्थानीय स्तर पर शांति और मध्यस्थता की क्षमता बढ़ाई जाए, जिसमें मानवाधिकारों की निगरानी और नफरत से निपटने के लिए प्रशिक्षण शामिल हो।
तीसरा, सदस्य देश ऐसे संवाद को बढ़ावा दें जो आपसी समझ और सामाजिक जुड़ाव बढ़ाए। स्थानीय नेता अफवाहों को खारिज कर सह-अस्तित्व को बढ़ावा दें। चौथा, विभिन्न हितधारकों के बीच आपसी सहयोग को और गहरा किया जाए ताकि स्थानीय विवादों को सुलझाया जा सके।
महासचिव ने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों में पारंपरिक नेताओं के साथ-साथ धर्म गुरुओं, युवाओं और महिला नेताओं को भी आगे रखना होगा, खासकर महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि नफरत रोकने के प्रयासों का इस्तेमाल अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब नुकसानदेह संदेश फैलाना भी नहीं है। उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र की रणनीतियों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
