वाशिंगटन, 12 जून (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही एक समझौता होगा, जिसके तहत बिना किसी टोल के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा, ईरान पर लगे प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी और मौजूदा संघर्षविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया जाएगा।
श्री ट्रंप ने गुरुवार को ह्वाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सप्ताहांत पर यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जायेगा। इसमें उप राष्ट्रपति जे डी वेंस शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज ‘अंतिम रूप’ में हैं और यह समझौता प्रक्रिया ‘जल्द’ पूरी हो जायेगी।
इस बीच, ईरान ने श्री ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए जोर दिया कि अमेरिका के साथ किसी समझौते पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने समझौते की खबरों को ‘अटकलबाजी’ करार देते हुए कहा कि अभी ‘कुछ भी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है’।
श्री ट्रंप से हालांकि जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समझौते के लिए सहमत हो गये हैं, उन्होंने कहा, “मेरी समझ से इसका जवाब हां है।”
दूसरी तरफ, एक्सीओस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यस्थता कर रहे देशों के एक राजनयिक और एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि समझौते के मसौदे पर दोनों पक्ष सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गये हैं, लेकिन अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। राजनयिक ने कहा कि हालांकि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से राजनीतिक रूप से अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है, फिर भी अमेरिका और ईरान ‘एक समझौते के मसौदे पर सहमत’ हो गये हैं। इस प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि समझौते को ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंजूरी दे दी है, लेकिन सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई द्वारा इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया जाना अभी बाकी है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस बात पर चर्चा चल रही है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को विदेश भेजने के बजाय, अंतरराष्ट्रीय निगरानी में ईरान के भीतर ही उसे कम (डाउन-ब्लेंड) कर दिया जाये। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई भी कदम तभी उठाया जाएगा जब दूसरा समझौता होगा। इस शुरुआती समझौते के लिए हुई बेहद कठिन बातचीत को देखते हुए दूसरे समझौते की संभावना अभी अनिश्चित लग रही है। हालांकि राजनयिक का दावा है कि यह शुरुआती समझौता ‘सभी परमाणु मुद्दों की बारीकियों को समेटे हुए है’ और ‘अमेरिका की सभी शर्तों को पूरा करता है।’
मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही को 30 दिनों के भीतर युद्ध से पहले के स्तर पर लाने की बात कही गई है। ईरान व्यावसायिक जहाजों पर टोल लगाने की अपनी व्यवस्था को रोकने पर सहमत होगा, और इसके बदले में अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटा लेगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने पहले संकेत दिया था कि ईरान को शुरुआती 60 दिनों के लिए तेल निर्यात करने की छूट देते हुए प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिल सकती है। आगे की राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि समझौते को कैसे लागू किया जाता है और आगे की बातचीत में क्या प्रगति होती है। राजनयिक ने कहा, “प्रतिबंधों से राहत के लिए कोई तारीख तय नहीं है और यह पूरी तरह समझौते के लागू होने से जुड़ी होगी।”
एक और बड़ा मुद्दा जो अभी तक अनसुलझा है, वह है विदेशों में जमा ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति। जहां ईरान अपनी कुछ रकम तुरंत पाने की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका का तर्क है कि कोई भी रकम किस्तों में और नियमों के पालन के आधार पर ही जारी की जानी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान और कतर ने कथित तौर पर एक ऐसी व्यवस्था पर चर्चा की है जिसके तहत ईरान कतर में अपनी कुछ रोकी गई रकम का इस्तेमाल मानवीय चीजें खरीदने के लिए कर सकेगा।
यह बड़ी कामयाबी तेहरान में बुधवार रात कतर के प्रतिनिधि दल और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई घंटों की बातचीत के बाद मिली है। इस बातचीत से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, वार्ता के दौरान कतर के प्रतिनिधि अल-थावादी ने श्री ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर से फोन पर कई बार बात की।
कतर और पाकिस्तान की संयुक्त मध्यस्थता वाले इस समझौते को ‘इस्लामाबाद समझौता’ के नाम से जाना जा सकता है, बशर्ते दोनों पक्ष आखिरकार इस मसौदे को मंजूरी देकर इस पर हस्ताक्षर कर दें। मध्यस्थ देश के राजनयिक ने कहा, “ हम दोनों पक्षों के साथ मिलकर समझौते को अंतिम रूप देने और हस्ताक्षर समारोह की तारीख तय करने पर काम कर रहे हैं। ”
