मुरली श्रीशंकर ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय लॉन्ग जम्पर बने

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय स्टार एथलीट मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लॉन्ग जम्प स्पर्धा में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता।

ग्लासगो, भारतीय स्टार लॉन्ग जम्पर मुरली श्रीशंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रचते हुए भारत को एक और सिल्वर मेडल दिलाया है। इसके साथ ही वो कॉमनवेल्थ गेम्स में दो पदक जीतने वाले भारत के पहले लॉन्ग जम्पर बन गए है। इससे पहले मुरली श्रीशंकर ने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीता था।

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में खेले गए पुरुषों के लॉन्ग जम्प फाइनल में मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया। जमैका के पूर्व विश्व चैंपियन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर के साथ ब्रॉन्ज अपने नाम किया ।

कैसा रहा फाइनल गेम?
फाइनल में मुरली श्रीशंकर ने पहली ही कोशिश में 8.03 मीटर की छलांग लगाई, जबकि दूसरी कोशिश में 8.09 मीटर के साथ बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद तीसरी और चौथी कोशिश फाउल रहीं। पांचवें प्रयास में उन्होंने 7.94 मीटर की छलांग लगाई, लेकिन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर उन्हें पीछे छोड़ दिया। आखिरी प्रयास में अंतर न मिट पाने के कारण जमैका के पूर्व विश्व चैंपियन ताजे गेल ने गोल्ड जीता, जबकि मुरली श्रीशंकर को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा, जिसके साथ ही वे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में लगातार दो पदक जीतने वाले भारत के पहले लॉन्ग जम्पर बन गए।

श्रीशंकर की शानदार वापसी
ये सिल्वर मेडल श्रीशंकर के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि करीब एक साल पहले पटेलर टेंडन फटने की गंभीर चोट ने उनके करियर पर सवाल खड़े कर दिए थे। अप्रैल 2024 में लगी इस चोट के कारण उन्हें सर्जरी करानी पड़ी और वे पेरिस ओलंपिक 2024 में हिस्सा नहीं ले सके थे। हालांकि, कड़ी मेहनत और शानदार वापसी के दम पर उन्होंने ग्लासगो में फिर से अपनी पहचान साबित कर दी।

भारत के नाम हुए चार पदक
मुरली श्रीशंकर की इस उपलब्धि के साथ भारत के नाम अब कॉमनवेल्थ गेम्स के लॉन्ग जम्प इतिहास में कुल चार पदक हो गए हैं। इससे पहले सुरेश बाबू ने 1978, ब्रॉन्ज , अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2002, ब्रॉन्ज और एम. प्रजुषा ने 2010, सिल्वर दिलाकर भारत के लिए पदक जीते थे। अब श्रीशंकर ने अपने दूसरे कॉमनवेल्थ पदक के साथ भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।

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