
जावरा। पिछले 12 वर्षों से अधूरी पडी पुलियाओं के निर्माण को लेकर असावती, भडका और रोला सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का धैर्य गुरूवार को जवाब दे गया। निर्माण कार्य में शासन-प्रशासन की निरंतर अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह 7:30 बजे जावरा-सीतामऊ मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। आवागमन बाधित होने से प्रशासन को हरकत में आना पडा। चक्काजाम की सूचना मिलते ही सेतु विभाग के सब-इंजीनियर और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति और स्पष्ट समय-सीमा की मांग पर अडे रहे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नायब तहसीलदार वैभव जैन धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की व्यथा सुनी और सेतु विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति पर जवाब-तलब किया।
प्रशासन का लिखित आश्वासन: लंबे विचार-विमर्श और ग्रामीणों के कड़े रुख के बाद सेतु विभाग ने निर्माण कार्यों के लिए लिखित आश्वासन दिया। असावती खाल पुलिया का आगामी दो दिनों के भीतर अस्थाई कार्य पूरा कर आवागमन शुरू किया जाएगा। रोला पुलिया 30 जुलाई तक अस्थाई रूप से आवागमन के लिए चालू कर दी जाएगी। असावती, भडका और रोला पुलिया का पूर्ण स्थाई निर्माण 31 अक्टूबर 2026 तक सुनिश्चित किया जाएगा। चंबल नदी पुलिया का निर्माण कार्य अक्टूबर 2026 में शुरू होकर दिसंबर 2027 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
12 साल से लटका है काम:ग्रामीणों का आरोप है कि चंबल नदी पर महादेव खाल, भडक़ा खाल और रोला खाल पर तीन पुलों का निर्माण 12 साल से अधूरा है। सेतु विभाग की लापरवाही और घटिया सामग्री के कारण नदी में खड़े पिलर जर्जर हो चुके हैं। बारिश में दर्जनों गांवों का संपर्क कट जाता है। स्कूली बच्चे, बीमार और किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं।
चेतावनी के साथ आंदोलन स्थगित
लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तो वे पुन: उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस धरना प्रदर्शन में दीपक परमार (असावती), गोपाल सिसोदिया, दिग्विजय सिंह, भेरूलाल परमार (मरम्या), ऋतुराज सिंह डोडिया, अफरोज मंसूरी, दिनेश गुजराती (आनखेड़ी), राधेश्याम धनगर, महेश आंजना, पदम आंजना (मेलुखेड़ी), गोपाल शर्मा (शक्करखेड़ी), मंजू बापू, कमल सिंह (बोरवनी), राकेश धनगर, बद्री पांचाल सहित आसपास के अनेक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
