इंदौर: लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक के ठिकानों पर एक साथ छापा मार कार्रवाई की है. लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय को मिली गोपनीय सूत्र सूचना के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है. आरोपी अधिकारी ने अपने 30 साल के सेवाकाल में पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार करते हुए अपनी वैध आय से 241 प्रतिशत अधिक अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की है, जिसकी शुरुआती सत्यापित कीमत ही करीब 9.5 करोड़ रुपए आंकी गई है.
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय को शिकायत मिली थी कि महिला एवं बाल विकास विभाग इंदौर में पदस्थ संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल ने अपने सेवाकाल के दौरान बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर अकूत बेनामी संपत्ति खड़ी की है. इस गंभीर सूचना के सत्यापन का जिम्मा कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास को सौंपा गया था. प्राथमिक जांच और सत्यापन में यह बात पूरी तरह प्रमाणित पाई गई कि कंडवाल के पास उनकी वैध आय की तुलना में करोड़ों रुपये की अधिक संपत्ति है. इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ प्रकरण किया और विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर बुधवार तड़के एक साथ छापेमारी की कार्रवाई शुरू की.
तीन टीमो ने की कार्रवाई
अचानक हुई इस कार्रवाई के लिए लोकायुक्त की तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया था, जिन्होंने आरोपी के आलीशान मकान, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर में एक साथ सर्चिंग शुरू की. लोकायुक्त की गणना के अनुसार, वर्ष 1996 से सरकारी सेवा में कार्यरत लक्ष्मी नारायण कंडवाल को उनके लगभग 30 वर्षों के सेवाकाल में वेतन से लगभग 2.5 करोड़ रुपए की वैध आय प्राप्त होनी चाहिए थी. इसके विपरीत, लोकायुक्त द्वारा अब तक सत्यापित की गई उनकी संपत्तियों का मूल्य ही 9.5 करोड़ रुपए से अधिक निकल चुका है, जो उनकी वैध आय से 241% ज्यादा है.
काली कमाई के दस्तावेज लगे जांच टीम के हाथ
सर्चिंग के दौरान लोकायुक्त टीम के हाथ जो काली कमाई के दस्तावेज लगे हैं, वे चौंकाने वाले हैं. आरोपी कंडवाल ने इंदौर के पॉश इलाके स्कीम नंबर 103 में 252 वर्ग मीटर के व्यावसायिक भूखंड पर लगभग 13,500 वर्ग फीट का आलीशान चार मंजिला निर्माण कर रखा है. इसके तीन तलों पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर का संचालन हो रहा है, जबकि चौथे व अंतिम तल पर वह अपने परिवार सहित अत्यंत सुख-सुविधाओं के साथ निवासरत है. इसके अलावा, स्कीम नंबर 140 जैसे प्राइम लोकेशन पर 1,000-1,000 वर्ग फीट के दो आवासीय प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं.
इतना ही नहीं, पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से सटे ग्रामीण इलाकों जैसे तारपुरा, बेकलाय और बनेड़िया आदि में 11 अलग-अलग कीमती भूखंडों की रजिस्ट्री भी बरामद हुई है.लोकायुक्त पुलिस की तीनों टीमों द्वारा अभी भी आरोपी अधिकारी के ठिकानों पर दस्तावेजों, बैंक लॉकरों, कीमती आभूषणों और नगदी की सघन सर्चिंग की जा रही है. लोकायुक्त अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और बैंक खातों व लॉकरों को खंगाला जाएगा, इस अनुपातहीन संपत्ति के आंकड़े में कई करोड़ रुपए का और इजाफा हो सकता है.
