
ग्वालियर। पुरानी छावनी में जय रामेश्वर मंदिर पर आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाचार्य पं सुरेश शास्त्री ने भागवत के श्लोक के माध्यम से इस महापुराण के महत्व को बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में 18 हजार श्लोक हैं, जिसमें से भगवान के मुख से निकले लगभग 15 सौ होंगे, बाकी अन्य श्लोकों में भगवान के भक्त ध्रुव, प्रह्लाद आदि की कथाएं हैं, लेकिन भगवान के भक्तों की कथाएं भी भागवत ही हैं। जो भागवत को सुनता है, वो भी भागवत हो जाता है। जो तन मन धन से भगवान का बन गया वो भागवत ही है।
उन्होंने कहा कि कथा का आशय कथ्य यानि किसी ने कहा और किसी न सुना वो कथा है,लेकिन सच यह है कि जो हम संसार की चर्चा करते हैं, वो व्यथा है और जो भगवान की चर्चा करते हैं, जिसे सुनकर मन में ब्रह्म की स्थापना हो जाए, वो कथा है।
उन्होंने कहा कि विशाल भवन मंदिर नहीं कहलाता है,लेकिन छोटे से भवन में यदि भगवान की प्रतिष्ठा हो जाती है तो वह मंदिर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि 18 पुराणों में सिर्फ भागवत ऐसा पुराण हैं, जिसमें से 17 पुराणों की रचना वेदव्यास ने की है,लेकिन भागवत पुराण में वही मिलेगा जो वेदों में है। उन्होंने कहा कि भगवान की कथा को हम जितनी बार सुनते हैें, हर बार नई लगती है।
मंगलाचरण के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए मंगलाचरण किया जाता है। जिसका ध्यान करने से आचरण मंगल हो जाता है, ऐसे भगवान का स्मरण मंगलाचरण में किया जाता है।
कथा परीक्षत सरोज प्रेम पचौरी ने भागवत पूजन किया। इस मौके पर एपेक्स बैंक के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, विवेक शेजवलकर, कमल मखीजानी, जंडेल गुर्जर, धीर सिंह तोमर, लवी खंडेलवाल, शैलू चौहान, पं जयराम पचौरी, रमेश पचौरी, भूपेंद्र शर्मा, सचिन पचौरी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
