कोलकाता, 08 जून (वार्ता) पश्चिम बंगाल में जादवपुर स्टेशन क्षेत्र में रेलवे अधिकारियों द्वारा रविवार की आधी रात के कुछ ही समय बाद चलाए गए अतिक्रमण हटाने के अभियान से तनाव और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं, जिसके परिणामस्वरूप कई वामपंथी और कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया और कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
सोमवार तड़के चलाए गए इस अभियान में बुलडोजरों ने स्टेशन परिसर के आसपास की कई कथित अवैध दुकानों और ढांचों को ध्वस्त कर दिया।
इस अभियान की आशंका में वामपंथी और कांग्रेस कार्यकर्ता, स्थानीय निवासियों और फेरीवालों के साथ, रविवार शाम से ही अतिक्रमण हटाने के विरोध में मौके पर जमा हो गए थे।
स्टेशन क्षेत्र में और उसके आसपास कोलकाता पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।
अभियान की तैयारी के तहत बैरिकेड्स लगाए गए थे और इलाके के कुछ हिस्सों में आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया था।
हिरासत में लिए गए लोगों में सीपीआई (एम) नेता सृजन भट्टाचार्य भी शामिल है।
पुलिस वाहन में ले जाते समय श्री भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि रेलवे अदालती प्रक्रियाओं की अवहेलना करते हुए “अवैध बेदखली” कर रहा है और दावा किया कि उन्हें गैरकानूनी रूप से हिरासत में लिया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने विध्वंस अभियान को रोकने का प्रयास किया, कुछ लोग बुलडोजर के सामने लेट गए जबकि अन्य ने कार्रवाई रोकने के प्रयास में मशीनों पर चढ़ गए।
विध्वंस कार्य शुरू होते ही तनाव बढ़ गया और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।
इस झड़प में कई लोग घायल हो गए, जिनमें थिएटर कलाकार जॉयराज भट्टाचार्य भी शामिल हैं, जिन्हें सिर में चोट आई है। इस घटना से इलाके में दहशत और अशांति फैल गई।
वामपंथी नेता सृजन भट्टाचार्य और उषासी चक्रवर्ती, कांग्रेस नेता सौरव प्रसाद के साथ रविवार शाम से ही विरोध स्थल पर मौजूद थे।
विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना था कि बेदखली कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है और फेरीवालों के पुनर्वास से संबंधित चल रही न्यायिक प्रक्रियाओं की अनदेखी है। कार्रवाई से पहले श्री भट्टाचार्य ने तर्क दिया था कि हालांकि रेलवे फेरीवालों के कब्जे को अवैध मानता है, लेकिन पुनर्वास और उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना कोई भी बेदखली गैरकानूनी है।
उन्होंने दावा किया कि पिछले सप्ताह रेलवे अधिकारियों के साथ हुई बातचीत से संकेत मिला था कि 8 जून को अदालतों के फिर से खुलने के बाद संबंधित अदालती आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत की जाएगी।
इसी बात को दोहराते हुए श्री चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि मामले को अदालत में पेश किए जाने से पहले बेदखली की कार्यवाही करना अदालत की अवमानना है।
पिछले मंगलवार की रात को जादवपुर स्टेशन क्षेत्र में भी इसी तरह का तनाव देखा गया था, क्योंकि बेदखली अभियान की आशंका थी।
हालाँकि स्थल के पास बुलडोजर तैनात थे, लेकिन वामपंथी कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद उस समय कोई तोड़फोड़ नहीं की गई थी।
यह ताजा कार्रवाई रेलवे अधिकारियों द्वारा प्रमुख रेलवे स्टेशनों, जिनमें हावड़ा और सियालदह शामिल हैं, के आसपास कथित अतिक्रमणों को हटाने के व्यापक अभियान के बीच की गई है, जहां हाल के हफ्तों में सैकड़ों अस्थायी ढांचे और सड़क किनारे की दुकानें हटाई गई हैं।
