
भोपाल। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (एमपीईएसबी), जिसे पूर्व में व्यापम के नाम से जाना जाता था, द्वारा आयोजित वनरक्षक, क्षेत्र रक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा-2026 की दूसरी पाली को बिना पूर्व सूचना के स्थगित किए जाने से हजारों अभ्यर्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुरैना, भिंड, दतिया, ग्वालियर, सागर और बालाघाट सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों ने भोपाल में पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा की दूसरी पाली दोपहर 2.30 बजे से 4.30 बजे तक निर्धारित थी और वे लंबी दूरी तय कर समय से परीक्षा केंद्र पहुंच गए थे।
अभ्यर्थियों के अनुसार प्रवेश एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें बताया गया कि परीक्षा कुछ देर से शुरू होगी। हालांकि कई घंटे इंतजार करने के बाद उन्हें अचानक परीक्षा केंद्र से बाहर जाने को कहा गया और जानकारी दी गई कि परीक्षा स्थगित कर दी गई है।
दिग्विजय सिंह ने इस घटना पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा संचालन का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से एप्टेक कंपनी को सौंपा गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि विवादों में रही कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई। उन्होंने दावा किया कि तकनीकी और सॉफ्टवेयर संबंधी खामियों के कारण परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी और बाद में अभ्यर्थियों को 20 जून को परीक्षा होने की सूचना दी गई।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उच्चस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा प्रभावित अभ्यर्थियों के यात्रा, भोजन और आवास संबंधी खर्च की भरपाई कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से युवाओं का भर्ती संस्थाओं और शासन व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
