सीहोर में बस संचालकों की दो टूक: 7 दिन में किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल

सीहोर। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों और परिवहन संचालन की बढ़ती लागत के बीच निजी बस संचालकों ने एक बार फिर बस किराए में वृद्धि की मांग तेज कर दी है. मध्य प्रदेश बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से बेहद कठिन होता जा रहा है. यदि सरकार जल्द किराया पुनर्निर्धारित नहीं करती है तो बसों के पहिए थम सकते हैं.

जिला मुख्यालय से भोपाल, इंदौर व अन्य शहरों सहित ग्रामीण अंचलों में बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है. इन दिनों डीजल के भावों में हो रही बढ़ोत्तरी ने बस का संचालन करना मुश्किल कर दिया है. बस आपॅरेटर अतुल राठौर काका की मानें तो डीजल के भावों ने बस संचालकों की कमर तोड़ दी है. अगर किराया नहीं बढ़ाया जाता है कि उनके पास बसों को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा.

बस संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स, इंजन ऑयल, ग्रीस, यूरिया और वाहन रखरखाव से जुड़े लगभग सभी खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है. इसके अलावा ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य कर्मचारियों के वेतन पर भी अतिरिक्त भार बढ़ा है. इसके बावजूद बस किराए में वृद्धि नहीं की गई, जिससे बस संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

बस ऑपरेटर्स के अनुसार हाल ही में डीजल की कीमतों में करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है. इससे संचालन लागत में भारी इजाफा हुआ है. उनका कहना है कि वर्तमान किराया व्यवस्था में बसों का नियमित रखरखाव और सुरक्षित संचालन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है. कई संचालकों की स्थिति ऐसी बन गई है कि वे वाहनों का समय पर मेंटेनेंस कराने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं. बस ऑपरेटर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हाल ही में प्रदेश के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में किराया निर्धारण के दौरान बस संचालकों ने 1.65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से किराया तय करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने केवल 1.25 रुपए प्रति किलोमीटर की दर मंजूर की थी. उस समय भी उनकी मांग पूरी नहीं हुई थी और इसके बाद से परिवहन क्षेत्र की लागत लगातार बढ़ती चली गई.

बस संचालकों का कहना है कि प्रदेश में पड़ोसी राज्यों की तुलना में बस किराया अपेक्षाकृत कम है, जबकि यहां डीजल और विभिन्न प्रकार के करों का भार अधिक है। इसी को देखते हुए एसोसिएशन ने सामान्य स्टेज कैरिज बसों का न्यूनतम किराया पहले 5 किलोमीटर के लिए 14 रुपए तथा इसके बाद 2.50 रुपए प्रति किलोमीटर निर्धारित करने की मांग सरकार के समक्ष रखी है.

एसोसिएशन ने सरकार को सात दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में किराया वृद्धि को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के बस संचालक सामूहिक हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे. उनका कहना है कि वे लंबे समय से घाटे में संचालन कर रहे हैं और अब आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि बिना किराया संशोधन के बसों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है. यदि हड़ताल होती है तो इसका असर हजारों यात्रियों पर पड़ सकता है.

वर्ष 2021 में किराया संशोधित हुआ था

ऑपरेटर्स का दावा है कि वर्ष 2021 में जब किराया संशोधित किया गया था, उस समय डीजल की कीमत करीब 81 रुपए प्रति लीटर थी. बाद में डीजल 100 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंचा, हालांकि टैक्स में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में कमी आई थी. अब फिर डीजल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं. बस संचालकों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 07 में किराया निर्धारण बोर्ड का गठन किया गया था. उस समय व्यवस्था बनाई गई थी कि हर छह माह में बोर्ड की बैठक आयोजित कर डीजल की कीमतों में वृद्धि होने पर किराए की समीक्षा की जाएगी. लंबे समय से इस व्यवस्था के अनुरूप नियमित समीक्षा नहीं हुई है.

 

 

 

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