नागपुर, (वार्ता) महाराष्ट्र के नागपुर में दोबारा नीट परीक्षा से पहले आत्महत्या करने वाली 20 वर्षीय छात्रा के परिवार ने आरोप लगाया है कि हाल ही में हुए नीट पेपर लीक विवाद और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराने के फैसले ने उसे यह जानलेवा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
यह छात्रा अपने परिवार के साथ नागपुर में रह रही थी, जहाँ उसके पिता रसोइए का काम करते हैं।
पीड़िता के परिवार का यह आरोप उस सुसाइड नोट पर आधारित है, जिसके बारे में उनका दावा है कि छात्रा के अंतिम संस्कार के बाद जब वे मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में अपने पैतृक गाँव लौटे, तो उन्हें वह नोट उसकी एक किताब के अंदर मिला। नोट में लिखा है , “मुझे नीट परीक्षा में अच्छे अंक लाने की बहुत उम्मीद थी, लेकिन अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अगर मुझे दोबारा परीक्षा देनी पड़ी, तो मैं वैसा ही प्रदर्शन कर पाऊँगी। माफ करना, मम्मी-पापा। मैंने सब कुछ बर्बाद कर दिया।”
परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि परीक्षा रद्द होने की ख़बर सुनने के बाद छात्रा गहरे अवसाद में चली गयी थी, हालांकि शुरुआत में उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस घटना का उस पर कितना गहरा असर पड़ा है।
पीड़िता के पिता ने कहा, “मेरी बेटी पढ़ाई में बहुत होशियार थी और हमेशा डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। हमारे पास सीमित संसाधन होने के बावजूद, हमने उसकी पढ़ाई के लिए लाखों रुपये का कर्ज़ लिया था। वह बहुत खुश थी और उसे पूरा भरोसा था कि उसे दाखिला मिल जाएगा, लेकिन जब पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आई, तो वह पूरी तरह टूट गयी। मेरी 20 साल की कड़ी मेहनत बेकार चली गई, क्योंकि सरकार परीक्षा ठीक से कराने में नाकाम रही।”
नौंवी कक्षा में पढ़ रहे अपने छोटे बेटे का जिक्र करते हुए दुखी पिता ने आगे कहा, “उसे इस सिस्टम की नाकामी की वजह से होने वाले मानसिक आघात से गुज़ारने के बजाय, उसे खेती-बाड़ी के काम में लगा देना ही बेहतर होगा।”
