सतना:खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को खाद की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विपणन संघ ने अपनी कमर कस ली है। पिछले साल खाद के लिए हुई मारामारी और किसानों की परेशानियों को देखते हुए इस बार विभाग पहले से ही सतर्क है। पिछले वर्ष की कुल खपत के मुकाबले इस साल 10 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त खाद की डिमांड भेजी गई है, ताकि ऐन वक्त पर यूरिया और डीएपी की कमी न हो।
खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती मुख्य रूप से की जाती है, जिसमें यूरिया और डीएपी खाद की अधिक भूमिका होती है। विशेष रूप से धान की फसल में यूरिया की अत्यधिक खपत होती है। पिछले वर्ष हुई खाद की किल्लत और किसानों की परेशानियों से सबक लेते हुए, प्रशासन ने इस साल यूरिया का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया है, ताकि मांग बढ़ने पर किसानों को किसी भी तरह की मारामारी या असुविधा का सामना न करना पड़े।
खाद वितरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए किसान ऑनलाइन पोर्टल में जाकर खाद के लिए आवेदन कर सकते हैं। जहाँ उन्हें अपनी जमीन के बारे में और बोई जाने वाली फसल का विवरण दर्ज करना होगा। जानकारी अपडेट होते ही पोर्टल के माध्यम से किसान को एक डिजिटल टोकन मिलता है , जिससे वो खाद प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था के लागू होने से किसान निर्धारित समय पर केंद्र पहुंचकर बिना किसी परेशानी या लंबी कतार के आसानी से अपनी जरूरत की खाद प्राप्त कर सकेंगे।
खाद की उपलब्धता और मांग
पिछले खरीफ सीजन में 10,705 टन यूरिया और 8,000 टन डीएपी की खपत हुई थी। इसे देखते हुए, इस वर्ष मांग में 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में मार्कफेड में 9,000 टन डीएपी और 4,000 टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। चूंकि यूरिया की आपूर्ति निरंतर अंतराल पर होती रहती है, बीच-बीच में आती रहती है मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था बनी हुई है।जिला विपणन अधिकारी नरेंद्र प्रताप ने बताया कि इस बार किसानों को खाद के लिए दिक्कत न हो उसके लिए 10 से 15 प्रतिशत अधिक खाद के लिए डिमांड भेजी गई है ।
