नयी दिल्ली 07 फरवरी (वार्ता) रियल एस्टेट उद्योग ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा करीब पांच वर्षाें के बाद नीतिगत दरों में की गयी 0.25 प्रतिशत की कटौती का स्वागत करते हुये कहा कि यह मांग बढ़ाने में मददगार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा, तरलता में सुधार होगा और किफायती आवास क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। एसपीजे ग्रुप के अध्यक्ष पंकज जैन ने कहा, “ रेपो रेट में कटौती रियल एस्टेट उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे उधार लेने की लागत कम होगी, जिससे घर खरीददारों की रूचि बढ़ेगी और डेवलपर को अपनी परियोजनाओं के लिए अधिक किफायती वित्तपोषण मिलेगा। खासकर मध्य और किफायती आवास क्षेत्रों में इस कदम से काफी लाभ होगा।”
यूनिटी ग्रुप के मुख्य परिचालन अधिकारी कुणाल बेहरानी ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “ यह दर कटौती आरबीआई की विकास समर्थक नीति का संकेत है और यह ऐसे समय आई है जब रियल एस्टेट उद्योग स्थिर वृद्धि की तलाश में था। कम होम लोन ब्याज दरें खरीदारों को निवेश के लिए प्रेरित करेंगी, जबकि डेवलपर्स को नई और मौजूदा परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण लागत में राहत मिलेगी।”
मोर्स के सीईओ मोहित मित्तल ने कहा कि करीब पांच वर्षों में पहली बार नीतिगत दर में कटौती का यह निर्णय आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह वित्तपोषण को अधिक आकर्षक बनाएगा और आवासीय एवं वाणिज्यिक रियल एस्टेट परिसंपत्तियों में नई रुचि उत्पन्न करेगा। उम्मीद है कि संस्थागत निवेश में तेजी आएगी और इस क्षेत्र की समग्र स्थिरता सुनिश्चित होगी।
केडीएमजी ग्रुप के सेल्स एंड मार्केटिंग निदेशक विवेक सिन्हा ने कहा कि आरबीआई का यह कदम सही दिशा में है। इससे होमबायर्स की पूछताछ में वृद्धि होगी और बाजार की धारणा मजबूत होगी। अब यह महत्वपूर्ण है कि बैंक और वित्तीय संस्थान इस कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक तेजी से पहुंचाएं, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिकतम सकारात्मक प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
