किसानों की उपज को ई-मार्केट मंचों के जरिये व्यापक बाजार तक पहुंचाने की पहल में मदद करें नाबार्ड जैसे संस्थान और स्थानीय प्रशासन:सीतारमण

यादगीर, 04 जून (वार्ता) केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)जैसी वित्तीय संस्थाओं और जिला प्रशासन से किसानों की उपज को ई-वाणिज्य एवं क्विक कामर्स मंचों के जरिए विस्तृत बाजार तक पहुंचाने की पहल में सक्रिय रूप से सहायता करने का आह्वान किया है।

श्रीमती सीतारमण गुरुवार को कर्नाटक के यादगीर जिले के बद्देपल्ली में महिला-नेतृत्व वाले कृषि-प्रसंस्करण केंद्र और किसान प्रशिक्षण एवं साझा सुविधा केंद्र (एफटी-सीएफसी) का उद्घाटन कर रही थी। यह सुविधा कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र में कृषि मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई किसान-केंद्रित पहलों की श्रृंखला के तहत स्थापित किया गया ऐसा पाँचवाँ केंद्र है। इस केंद्र की स्थापना नाबार्ड और वित्त मंत्री के सांसद क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड फंड) का उपयोग करके की गयी है, जिसका उद्देश्य मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना,फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, बाजार तक पहुँच को बेहतर बनाना और किसानों के लिए आजीविका के स्थायी अवसर पैदा करना है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा, ‘ मैं राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड ) से आग्रह करती हूँ कि वह ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए इन उत्पादों को व्यापक बाज़ार तक पहुँचाने में मदद करे। मैं जिला प्रशासन से भी अनुरोध करती हूँ कि वे इस यूनिट को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने में मदद करने के लिए सभी ज़रूरी सहयोग प्रदान करें।’

बद्देपल्ली की इस परियोजना की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसका प्रबंधन ‘बद्देपल्ली महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड’ द्वारा किया जा रहा है; यह एक ऐसा किसान उत्पादक संगठन है जिसमें 727 महिला सदस्य शामिल हैं, जो इसे इस क्षेत्र की पहली महिला-नेतृत्व वाली कृषि-प्रसंस्करण सुविधा बनाती है। इस केंद्र से महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के लिए एक आदर्श (मॉडल) के रूप में काम करने की उम्मीद है,क्योंकि यह महिला किसानों को कृषि मूल्य श्रृंखला के हर चरण में -उत्पादन और प्रसंस्करण से लेकर ब्रांडिंग और विपणन तक भाग लेने में सक्षम बनाता है।

श्रीमती सीतारमण ने सभा को संबोधित करते हुए कहा: “मुझे इस एग्रो-प्रोसेसिंग सेंटर का उद्घाटन करते हुए बहुत खुशी हो रही है, जिसे पूरी तरह से महिलाएं चला रही हैं। यादगीर, जो कर्नाटक के सबसे नए जिलों में से एक है, अभी भी विकास से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें महिलाओं की कम साक्षरता दर और बहुआयामी गरीबी शामिल है। इस तरह की पहल से लोगों की आय बढ़ाने, रोज़गार के अवसर पैदा करने और जिले में जीवन की समग्र गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि कृषि यादगीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई है, जहाँ जिले की लगभग 75 प्रतिशत ज़मीन पर खेती होती है। यह जिला हर साल लगभग 22,500 टन मूंगफली का उत्पादन करता है। यह सुविधा किसानों को कच्चे उत्पाद कोवैल्यू-एडेड उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाएगी, जैसे कि भुनी और नमकीन मूंगफली, पीनट बटर, मूंगफली का तेल और डी-ऑयल्ड केक; जिससे उत्पादकों को बेहतर मुनाफा मिल सकेगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि वह यादगीर मूंगफली’ को देश भर के अन्य सफल कृषि उत्पादों की तरह ही एक पहचाने हुए ब्रांड के रूप में उभरते हुए देखने के लिए उत्सुक है। इस अवसर पर नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी के.वी. ने कहा: “यादगीर ट्रेनिंग-कम-प्रोसेसिंग सेंटर किसानों के नेतृत्व में वैल्यू एडिशन और महिला उद्यमिता के लिए एक विस्तार योग्य मॉडल का प्रतिनिधित्व करता है। यह वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण के उस सपने के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी को मज़बूत करना और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के स्थायी अवसर पैदा करना है।”

 

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