सतना: एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन और मिशन कायाकल्प से पुरस्कृत जिला चिकित्सालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली कितनी संवेदनहीन है उसकी एक बानगी बुधवार को उस वक्त देखने को मिली जब महज एक स्ट्रेचर के इंतजार में जब प्रसव पीडि़ता अस्पताल के दरवाजे पर आधे घंटे तक दर्द से कराहती रही. यह तो गनीमत रही कि एंबुलेंस में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित पाए गए.
लेकिन इस लापरवाह कार्यशैली ने उनकी जान सांसत में डालने के लिए कोई कसर नहीं रख छोड़ी थी.प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के रामपुर चौरासी गांव की निवासी महिला साधना यादव को बुधवार को प्रसव पीड़ा शुरु हो गई. जिसके चलते स्थानीय आशा कार्यकत्र्ता केतकी बाई प्रसव पीडि़ता को जननी एक्सपे्रस क्र. सीजी 04 एनजेड 6041 में लेकर जिला अस्पताल पहुंची.
बताया गया कि जननी एक्सप्रेस जब अस्पताल के मुख्य गेट पर पहुंच गई तो फौरन ही नीचे उतरकर आशा कार्यकत्र्ता ने स्ट्रेचर की तलाश शुरु की. मुख्य गेट से लेकर अंदर तक जब कोई स्ट्रेचर नहीं दिखाई दिया तो आशा कार्यकत्र्ता ने वहां पर मौजूद कुछ कर्मचारियों से मदद मांगी. लेकिन कर्मचारियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि कोई एंबुलेंस खाली नहीं है. बताया गया कि आशा कार्यकत्र्ता और प्रसव पीडि़त महिला के परिजन लगभग आधा घंटे तक परेशान रहे.
लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की. वहीं दूसरी ओर समय बीतने के साथ ही महिला का दर्द और बढ़ता गया. जिसे देखते हुए एंबुलेंस के अंदर ही प्रसव कराया गया. एंबुलेंस में प्रसव होने के बाद जच्चा-बच्चा दोनों को अस्पताल में भर्ती किया गया. जहां में दोनों स्वस्थ्य पाए गए. यह तो गनीमत ही रही कि एंबुलेंस में प्रसव के बावजूद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य पाए गए. लेकिन इस तरह की संवेदनहीन कार्यशैली मरीजों के स्वास्थ्य के लिहाजा से काफी गंभीर साबित हो सकती थी.
