जबलपुर: जिले में धान उपार्जन के दौरान कई केंद्रों पर किसानों से अधिक धान लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई उपार्जन केंद्रों पर किसान आरोप लगा रहे हैं कि समिति सदस्य और वेयरहाउस संचालक मिलकर नमी की आड़ में अतिरिक्त धान जमा करा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वास्तविक नमी मापे बिना ही उन्हें अधिक मात्रा में धान देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। प्रत्येक किसानों से लगभग 4- 5 किलो अतिरिक्त धान ली जा रही है। सूत्रों ने बताया कि कई तहसील में बने कुछ केंद्रों पर महिला समूह द्वारा धान खरीदी की जा रही है, जहां किसानों के पूछने पर महिला समूह का कहना है कि नमी के कारण अधिक धान ले रहे हैं।
पहले से है मिलीभगत, बिचौलिए भी सक्रिय
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समिति और वेयरहाउस के बीच पहले से ही गुप्त समझौता चलता आ रहा है। तय सीमा से अधिक धान लेने का फायदा वेयरहाउस संचालकों को मिलता है, जबकि नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। किसानों का आरोप है कि नमी की मनमानी इस गठजोड़ का सबसे बड़ा हथकंडा बन चुकी है। इसके अलावा कई किसानों से जल्दी धान तुलवाने के लिए अधिक पैसों की मांग की जा रही है, और इस पर बिचौलिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में बने हुए है।
लुटने को मजबूर किसान, समाधान की राह तकते
अधिक धान देने से किसान न केवल आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, बल्कि कई बार उन्हें बार-बार केंद्र तक चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नमी जांच की पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए और समिति–वेयरहाउस के इस गठजोड़ पर अधिकारियों द्वारा जांच करते हुए तुरंत कार्रवाई की जाए।
