मुंबई, 01 जून (वार्ता) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार पर अनिवार्य ई-केवाईसी सत्यापन के बहाने ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना’ को जानबूझकर कमजोर करने और लाभार्थियों को बाहर करने का आरोप लगाया। एक्स’ पर जारी पोस्ट में श्री रोहित पवार ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले इस फ्लैगशिप योजना में करीब 2.47 करोड़ महिलाएं पंजीकृत थीं , लेकिन अब सत्यापन के नाम पर लगभग 81 लाख महिलाओं को सूची से हटा दिया गया है, जिससे लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.66 करोड़ से 1.77 करोड़ के बीच रह गयी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ई-केवाईसी तो बस एक बहाना है, असली मकसद इस योजना को चरणों में धीरे-धीरे बंद करना है।
श्री रोहित पवार ने सरकार को योजना के तहत पहले से बांटी जा चुकी राशि की वसूली के लिए कोई भी कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी दी। कार्यक्रम पर हुए खर्च का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार अब तक खर्च किए गए करीब 15,000 करोड़ रुपये वसूलने का इरादा रखती है, तो इसकी जिम्मेदारी महिला लाभार्थियों के बजाय मंत्रियों और अधिकारियों पर होनी चाहिए।उन्होंने चेतावनी दी कि लाभार्थियों को परेशान करने या उनसे पैसे वापस लेने की कोई भी कोशिश आखिरकार सरकार के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित होगी। उनके सोशल मीडिया अभियान में योजना का समर्थन करने वाले और महिला लाभार्थियों के प्रति उनके शब्दों में हुए ‘अन्याय’ की आलोचना करने वाले हैशटैग शामिल थे।
यह विवाद महाराष्ट्र सरकार के राज्य भर में चलाये जा रहे एक सत्यापन अभियान की पृष्ठभूमि में सामने आया है। जुलाई 2024 में शुरू की गयी ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना’ के तहत सालाना 2.5 लाख रुपये से कम कमाने वाले परिवारों की 21 से 65 वर्ष के बीच की योग्य महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होती है।
अपने चरम पर 2.4 करोड़ से अधिक महिलाओं के पंजीकरण के साथ यह कार्यक्रम महाराष्ट्र की सबसे प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में से एक बन गया और इसे व्यापक रूप से महायुति गठबंधन की चुनावी सफलता में बड़ा कारक माना गया। हाल ही में अयोग्य लाभार्थियों की शिकायतों के बाद सरकार ने ई-केवाईसी, आय सीमा और चौपहिया वाहन के स्वामित्व जैसी शर्तों की कड़ाई से जांच शुरू की थी, जिसकी अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गयी। विपक्ष (राकांपा-एसपी और शिवसेना-यूबीटी) का आरोप है कि सरकार वित्तीय दबाव के कारण इस योजना का बजट और लाभार्थियों की संख्या कम कर रही है। दूसरी ओर सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित वरिष्ठ नेताओं ने साफ किया है कि यह अभियान केवल फर्जीवाड़ा रोकने और लाभ को केवल वास्तविक योग्य महिलाओं तक सीमित करने के लिए चलाया गया है। यह कल्याणकारी योजना किसी भी हाल में बंद नहीं होगी।

