

भोपाल। आठ वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित दो दिवसीय कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में जनकल्याण, विकास और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब यह कांफ्रेंस नियमित रूप से वर्ष में कम से कम एक बार और संभव हो तो दो बार आयोजित की जाएगी।
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में संपन्न इस कांफ्रेंस में 55 जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संभागीय आयुक्त और पुलिस आयुक्त शामिल हुए। दो दिनों में आठ सत्रों में कानून व्यवस्था, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक निवेश, रोजगार, नगरीय विकास, ग्रामीण विकास और सुशासन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तीन माह और एक वर्ष के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को जिले स्तर पर नवाचार प्रस्तुत करने और समस्याओं का समाधान सुनने का अवसर भी दिया। प्रत्येक जिला कलेक्टर को पांच वर्ष के विकास विज़न डॉक्यूमेंट के अनुसार कार्य प्राथमिकता से पूरा करने का निर्देश दिया गया।
डॉ. यादव ने विकास समितियों के गठन, जल जीवन मिशन के अधूरी योजनाओं की समय-सीमा में पूर्णता, स्कूलों में उपस्थिति मॉनिटरिंग, छात्रवृत्ति समय पर वितरण, ग्राम स्तर पर पेयजल योजनाओं की समीक्षा और पीएम आवास योजनाओं के शीघ्र पूर्ण होने पर भी जोर दिया।
किसानों और पशुपालकों के लिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने का लक्ष्य भी रखा गया। इसके अलावा, अगले वर्ष जल गंगा संवर्धन अभियान की कार्ययोजना तैयार करने और वन अधिकार अधिनियम के लंबित मामलों का समाधान दिसंबर 2025 तक करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 दिसंबर को वर्तमान सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राज्य और जिले स्तर की उपलब्धियों व नवाचारों पर केंद्रित विकास प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी।
