
छतरपुर। जिले के बहुचर्चित रेलवे लोको पायलट जीतेंद्र चौरसिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी धर्मेंद्र चौरसिया उर्फ डी.के. (36) की शनिवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। धर्मेंद्र गढ़ीमलहरा के सुभाष वार्ड का निवासी था और हत्या के इस चर्चित मामले में गिरफ्तारी के बाद सतना जेल में न्यायिक अभिरक्षा में बंद था। बताया गया है कि अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए जबलपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। रविवार को उसका अंतिम संस्कार गढ़ीमलहरा में किया गया।
उल्लेखनीय है कि 21 दिसंबर 2024 को गढ़ीमलहरा निवासी रेलवे लोको पायलट जीतेंद्र चौरसिया रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे। बाद में पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उनके बचपन के मित्र धर्मेंद्र चौरसिया ने अपने साथियों गुलाब सिंह यादव, पवन प्रजापति और चचेरे भाई नीरज चौरसिया के साथ मिलकर उनका अपहरण किया था। आरोपियों की योजना जीतेंद्र के परिवार से एक करोड़ रुपये की फिरौती वसूलने की थी।
पुलिस के अनुसार जीतेंद्र को घूमने के बहाने बुलाया गया, शराब पिलाई गई और नींद की दवा देकर बोलेरो वाहन से पन्ना जिले की ओर ले जाया गया। रास्ते में जब उसे साजिश का संदेह हुआ और उसने विरोध किया, तब पवई क्षेत्र के चांदसी घाट पर धर्मेंद्र ने उसके सिर में गोली मार दी। हत्या के बाद शव को घाटी में फेंक दिया गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार, बोलेरो वाहन, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज बरामद किए थे। वर्तमान में मामले के आरोपी गुलाब सिंह यादव और नीरज चौरसिया जमानत पर हैं, जबकि पवन प्रजापति अभी भी जेल में बंद है। मुख्य आरोपी धर्मेंद्र की मौत के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
