इंदौर: छोटा उदयपुर-धार और इंदौर-धार रेल लाइन जुड़ते ही मुंबई से दिल्ली के लिए धार, टांडा रोड और अलीराजपुर होते हुए वैकल्पिक रेल मार्ग तैयार हो जाएगा. प्रोजेक्ट में अब सिर्फ 50 किलोमीटर काम शेष है, जो पूरा होते ही मालवा–निमाड़ क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा.यह रेल लाइन शुरू होने पर धार, अलीराजपुर, छोटा उदयपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को पहली बार सीधी और तेज रेल कनेक्टिविटी मिलेगी. अभी इन क्षेत्रों के लोगों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए इंदौर या अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है.
नए रूट के चालू होने से मुंबई-दिल्ली के बीच ट्रेनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा समय में कमी आएगी. माल ढुलाई आसान होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, कृषि उपज और स्थानीय व्यापार को बड़ा फायदा मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. रेलवे लाइन शुरू होने पर पेट्रोल-डीजल की खपत में कमी आएगी और सड़क यातायात का दबाव घटेगा. साथ ही बाघ गुफाएं, अलीराजपुर और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. फिलहाल दाहोद–धार सेक्शन सहित कई हिस्सों में काम लंबित है, लेकिन शेष 50 किलोमीटर का निर्माण पूरा होते ही यह पूरा कॉरिडोर क्षेत्र के विकास की नई रीढ़ बन सकता है.
यह होगा फायदा
धार रेल प्रोजेक्ट पूरा होने पर मालवा-निमाड़ और आदिवासी अंचलों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने से यात्रा आसान और सस्ती होगी. मुंबई-दिल्ली के बीच वैकल्पिक रूट बनने से ट्रेनों का दबाव घटेगा और समय की बचत होगी. पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, कृषि उपज और स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी. सड़क ट्रैफिक कम होने से ईंधन की बचत होगी और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा.
अंतिम चरण में पहुंचकर अटका
धार रेल प्रोजेक्ट की नींव करीब दो दशक पहले रखी गई थी. दाहोद-इंदौर नई रेल लाइन को 2008-09 के आसपास मंजूरी मिली, जिसके बाद अलग-अलग चरणों में काम शुरू हुआ. जमीन अधिग्रहण, वन स्वीकृति और तकनीकी कारणों से प्रोजेक्ट की रफ्तार बार-बार प्रभावित होती रही. कई हिस्सों में आंशिक काम पूरा हुआ, लेकिन पूरा कॉरिडोर आज भी अधूरा है और अंतिम चरण में पहुंचकर अटका हुआ है.
