नयी दिल्ली 30 मई (वार्ता) भारत के रक्षा निर्यात और दक्षिण-पूर्व एशिया में रणनीतिक पहुंच से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में फिलीपींस के बाद अब वियतनाम ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जबकि इंडोनेशिया के साथ इस संबंध में बातचीत अंतिम चरण में है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज द्वारा आयोजित 23वें शांग्री-ला डायलॉग में एक पैनल चर्चा के दौरान यह बात कही। इस समझौते से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का पता चलता है।
श्री सिंह ने दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस मिसाइल के संभावित खरीदारों के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण विश्वास और रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित होता है। उन्होंने कहा ,” जैसा हमने बताया था फिलीपींस इसका पहला खरीदार था।”
रक्षा सहयोग के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “कोई भी देश अपने अधिक उन्नत हथियार और प्लेटफॉर्म उन देशों को बेचेगा जो मित्र विदेशी देश हैं। आप इसे किसी विरोधी या ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं बेचेंगे जो इसे किसी विरोधी को दे सकता हो।”
श्री सिंह ने कहा, “मेरी समझ से, इंडोनेशिया और वियतनाम दोनों के साथ समझौता अंतिम चरण में है। वास्तव में, वियतनाम के मामले में, मेरी जानकारी के अनुसार इस पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं। शायद इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इस पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।”
रक्षा सचिव ने जोर देकर कहा कि भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को विश्वसनीय भागीदारों के रूप में देखता है और उनके साथ उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “आसियान देशों के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता है और हम आप सभी को मित्र विदेशी देशों के रूप में देखते हैं जिनके साथ हम उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों को साझा कर सकते हैं।”
इस समझौते की पुष्टि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच आसियान देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने और इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के भारत के प्रयासों में मील का पत्थर है।
वियतनाम के साथ हुए इस समझौते से भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है, जिनके बीच पहले से ही एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी मौजूद है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच वियतनाम लगातार अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है और अपनी समुद्री क्षमताओं को बढ़ा रहा है।
इंडोनेशिया के साथ संभावित समझौता, दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख समुद्री राष्ट्रों के साथ भारत की रक्षा भागीदारी को और मजबूत करेगा और भारत की व्यापक ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है। इसे भारत की कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने मिलकर बनाया है। यह कंपनी भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और रूस की कंपनी का एक साझा उद्यम है।
ब्रह्मोस को सतह, समुद्र, हवा और पनडुब्बी किसी भी जगह से दागा जा सकता है। यह मैक 3 की रफ़्तार से अपने लक्ष्य पर निशाना साध सकती है, जिससे इसे बीच में रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह भारत की पारंपरिक रक्षा क्षमता का एक अहम हिस्सा बन गई है।
जनवरी 2022 में फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने वाला पहला विदेशी ग्राहक बना था। यह सौदा लगभग 37 करोड़ डॉलर का था और इसे तटीय रक्षा मिसाइल के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौता माना गया है। इस सौदे को भारत के रक्षा निर्यात के सपनों की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा गया है।
