सिंगापुर में अमेरिकी युद्ध मंत्री हेगसेथ ने भारत की सराहना की, कहा- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता का मुख्य स्तंभ

सिंगापुर, 30 मई (वार्ता) अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता का मुख्य स्तंभ बताया है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है” जब वॉशिंगटन चीन के सैन्य विस्तार का मुकाबला करने के लिए अपनी क्षेत्रीय रणनीति को और धार दे रहा है, और साथ ही अपने सहयोगियों पर रक्षा जिम्मेदारियों को बढ़ाने का दबाव बना रहा है। श्री हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित ‘शांग्री-ला डायलॉग’ में कहा कि भारत की बढ़ती सैन्य क्षमताएं और उसका रक्षा-औद्योगिक आधार इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाये रखने के लिए बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाये रखने वाली भूमिका निभाता है और व्यापक क्षेत्रीय संतुलन में अपना योगदान देता है।

उन्होंने कहा, “दक्षिण एशिया में मोर्चा संभाले रखने के लिए भारत एक अहम धुरी है। अपने खुद के हितों के लिए काम करने वाला एक शक्तिशाली भारत पूरे क्षेत्र में ताकत का संतुलन बनाये रखने के हमारे साझा मकसद को आगे बढ़ाता है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत का मौजूदा सैन्य आधुनिकीकरण अमेरिका और उसके सहयोगियों की अगुवाई वाले व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा प्रयासों को मजबूती देता है। “भारत सुरक्षा के इस बोझ में अपनी हिस्सेदारी उठाने के लिए अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, खास तौर पर हिंद महासागर में।”

श्री हेगसेथ ने भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षमता की तारीफ की। उन्होंने क्षेत्रीय अभियानों और अमेरिकी सेनाओं दोनों की मदद करने में भारत की संभावित भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ” बड़े स्तर के सैन्य अभियानों को जारी रखने के लिए भारत भारी औद्योगिक और लॉजिस्टिक क्षमता का निर्माण कर रहा है। इसमें हमारे साझा प्लेटफार्मों की मरम्मत और रख-रखाव करने तथा क्षेत्र में आगे बढ़कर काम कर रहे अमेरिकी नौसेना के जहाजों को सहयोग देने की क्षमता भी शामिल है।” उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ते द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का भी जिक्र किया, जिसमें सह- उत्पादन पहल भी शामिल है। “हमने ‘जैवलीन एंटी-टैंक गाइडेड म्यूनिशन्स’ जैसी क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत के साथ सह-उत्पादन पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जतायी है। यह हमारी सेनाओं की सामूहिक तैयारी को बेहतर बनाने की दिशा में वास्तविक और ठोस कदम हैं।”

उन्होंने कहा कि इस तरह का औद्योगिक सहयोग अब कोई लंबी अवधि की महत्वाकांक्षा नहीं रह गयी है, बल्कि यह एक तात्कालिक रणनीतिक जरूरत है। “इस तरह की औद्योगिक ताकत सिर्फ दीर्घकालिक लक्ष्य नहीं है, यह एक तात्कालिक परिचालन आवश्यकता है।”
श्री हेगसेथ की यह टिप्पणियां तब आयी हैं, जब उन्होंने चीन के सैन्य विस्तार पर अपनी चिंताओं को फिर से दोहराया, जिसे उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मुख्य चुनौती बताया। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी एक ताकत के हावी होने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि अमेरिका यहां ताकत का संतुलन बनाये रखना चाहता है। उन्होंने कहा, “चीन के ऐतिहासिक सैन्य विस्तार और इस क्षेत्र तथा इससे बाहर उसकी सैन्य गतिविधियों के बढ़ने को लेकर आशंका है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अपनी ताकत के दम पर चीन को रोकना है। उन्होंने कहा, “हम इस चुनौती को बिना वजह के टकराव के साथ नहीं, बल्कि नपे-तुले और सोचे-समझे मजबूत रुख के साथ देख रहे हैं।”

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