चेम्सफोर्ड, 29 मई (वार्ता) घुटने की सर्ज़री के बाद वापसी कर रहीं यास्तिका भाटिया को लगा था कि वह फिर से एक नई शुरुआत कर रही हैं। लेकिन इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले टी 20 में ऐसा लगा कि वह जैसे हमेशा से ही भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम का हिस्सा रही हों। ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि यह अक्तूबर 2024 के बाद उनका पहला अंतरराष्ट्रीय मैच है। बस वही अच्छी फ़ॉर्म दिखी, जो उन्होंने अभ्यास में दिखाई थी। मैच के पहले ही ओवर में लॉरेन बेल ने स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा को आउट कर भारत का स्कोर 2 विकेट पर 7 रन कर दिया था। हरमनप्रीत कौर एकादश में नहीं थीं और उन्हें जेमिमा रॉड्रिग्स के साथ भारतीय पारी को संभालना था। दोनों ने ऐसा किया भी और तीसरे विकेट के लिए 76 गेंदों में 126 रन की साझेदारी की। इस साझेदारी ने ही चेम्सफ़ोर्ड में भारत की 38 रनों की जीत की नींव रखी। रॉड्रिग्स ने 40 गेंदों में 69 रन बनाए और यास्तिका ने उतनी ही गेंदों में 54 रन की पारी खेली।
पिछले साल वनडे विश्व कप की ट्रेनिंग कैंप के दौरान उनके घुटने में चोट लगी थी और अक्तूबर में उनकी सर्ज़री हुई। इसके कारण वह 50 ओवर विश्व कप और इस साल के डब्ल्यूपीएल से बाहर हो गई थीं। 2024 में वह भारत की टी20 विश्व कप टीम का हिस्सा थीं, लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौक़ा नहीं मिला था। और फिर डब्ल्यूबीबीएल के दौरान उनकी कलाई में चोट लग गई थी। गुरुवार को अपनी पारी के बारे में यास्तिका ने कहा, “यह पारी बहुत ख़ास है। मैं लंबे समय बाद वापसी कर रही हूं और टीम ने मेरा बहुत अच्छे से स्वागत किया। वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है। चोट के समय चीज़ें आसान नहीं होतीं, लेकिन कुछ लोग मेरा साथ दे रहे थे। मैं उन सभी लोगों की बहुत आभारी हूं, जो उस समय मेरे साथ थे। टीम में फिर से वापसी करने के लिए पर्दे के पीछे बहुत मेहनत हुई है।
“जिन लोगों की एसीएल सर्जरी होती है, उस पैर की पूरी मसल चली जाती है। हमें सब कुछ फिर से शुरू से बनाना पड़ता है। इसलिए सर्ज़री के बाद रिहैब की प्रक्रिया से गुजरना काफ़ी मुश्किल था और कई दिन ऐसे भी थे, जब कुछ होता हुआ नहीं दिख रहा था, कोई प्रगति नज़र नहीं आ रही थी। लेकिन अपने लोगों की सपोर्ट की वजह से मैं लगातार आगे बढ़ती रही, लगातार मेहनत करती रहीं। फिर कुछ महीनों बाद सुधार दिखने लगा। जेमी और पूरी टीम मेरे संपर्क में थे… स्टाफ़, टीम प्रबंधन, सब। इसलिए मैं उनके सपोर्ट के लिए बहुत आभारी हूं। अंत भला तो सब भला।” यास्तिका की तरह तेज़ गेंदबाज़ नंदनी शर्मा का अंतरराष्ट्रीय डेब्यू भी ख़ास रहा, जिन्होंने लगातार दो गेंदों पर दो विकेट सहित मैच में 34 रन देकर 3 विकेट लिए। उन्होंने एमी जोंस को आउट किया, जो इंग्लैंड की तरफ से अकेली बल्लेबाज़ थीं जिन्होंने असली संघर्ष दिखाया। नंबर-3 पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 67 रन बनाए, जो 2020 के बाद उनका पहला टी20 अर्धशतक था। इसके अलावा डैनी गिब्सन को भी उन्होंने आउट किया। दोनों के कैच शेफाली ने डीप में लिए। फिर उन्होंने अपनी स्लोअर गेंद पर इज़ी वोंग को बोल्ड किया।
24 साल की नंदनी इस साल के डब्ल्यूपीएल में सोफ़ी डिवाइन के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज़ थीं। उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए 18.58 की औसत और 8.31 की इकॉनमी से 17 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 33 रन देकर 5 विकेट था, जिसमें हैट्रिक भी शामिल थी, जो उन्होंने गुजरात जायंट्स के खिलाफ़ टूर्नामेंट के सिर्फ़ अपने दूसरे मैच में लिया था। यास्तिका ने कहा, “नंदनी ने बहुत ख़ूबसूरती से गेंदबाज़ी की। उन्होंने अपनी स्लोअर गेंदों का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया और वही उनकी ताक़त है। उन्होंने अपनी ताक़त के हिसाब से शानदार गेंदबाज़ी की और विकेट हासिल किए। डेब्यू मैच में ऐसा प्रदर्शन कमाल का होता है।” “नंदनी डब्ल्यूपीएल की देन हैं और वहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। इसलिए उन्हें यहां आकर इतना अच्छा करते देखना बहुत अच्छा लगा। उनका डेब्यू देखकर हम सभी भावुक हो गए थे और जब उन्हें कैप मिली तो वह भी भावुक थीं। इसलिए यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि उन्होंने आज इतना अच्छा प्रदर्शन किया। भारतीय क्रिकेट के लिए यह बहुत रोमांचक समय है कि जो भी खिलाड़ी टीम में आ रहा है, वह अपनी छाप छोड़ रहा है और योगदान दे रहा है।” भारत को उम्मीद है कि शनिवार को ब्रिस्टल में होने वाले दूसरे मैच में हरमनप्रीत वापसी करेंगी। सीरीज़ में बने रहने के लिए इंग्लैंड के लिए यह करो या मरो का मुक़ाबला होगा।

