
नीमच: नीमच-सिंगोली-कोटा मार्ग के तिलस्वा घाट पर लगातार हो रहे हादसों के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। पिछले तीन दिनों में यहां दो भीषण सडक़ दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई और करीब 35 लोग घायल हुए हैं। रविवार को शिवशक्ति बस हादसे के बाद मंगलवार रात एक और दुर्घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया। लगातार हो रहे हादसों से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।
कलेक्टर के निर्देश पर पहुंची टीम जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। कार्यपालन यंत्री अमित नर्गिस भी निरीक्षण दल में शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने माना कि सडक़ किनारे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है, ढलान खतरनाक है और संकेतक बोर्डों की कमी है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ रहा है।
सुधार कार्य निर्माण परियोजना में शामिल अधिकारियों के अनुसार नीमच-कोटा हाईवे निर्माण कार्य के तहत इस घाट क्षेत्र का सुधार भी शामिल है। इसे आधुनिक मानकों के अनुसार सुरक्षित बनाने का काम किया जाएगा, लेकिन इसमें लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तिलस्वा घाट लंबे समय से दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है। संकरी सडक़, तीखे मोड़ और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय रहते कदम उठाए जाते तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
तत्काल सुधार के निर्देश लोक निर्माण विभाग ने घाट क्षेत्र में चेतावनी और संकेतक बोर्ड लगाने का काम शुरू कर दिया है। साथ ही ढलान कम करने और मोड़ों को सुरक्षित बनाने पर भी काम किया जा रहा है। कार्यपालन यंत्री अमित नर्गिस ने बताया कि घाट क्षेत्र में करीब 60 प्रतिशत ढलान की समस्या है, जो वाहनों के असंतुलन का प्रमुख कारण बन रही है।
