इंदौर: भीषण गर्मी के बीच जहां एक ओर आम जनता पानी की समस्या से परेशान है, वहीं दूसरी ओर पानी के टैंकरों के जरिए हो रही मनमानी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.शहर में जल संकट को लेकर नेता धरना-प्रदर्शन कर जनता को पानी दिलाने की बात कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा कर व्यवस्था सुधारने और शिकायतों पर कार्रवाई करने में जुटे हुए हैं.
इसके बावजूद टैंकर माफिया पर लगाम नहीं लग पा रही है. नगर निगम द्वारा निःशुल्क पानी वितरण के लिए चलाए जा रहे टैंकरों पर पहले बड़े-बड़े अक्षरों में ‘नगर निगम टैंकर- निःशुल्क पानी’ लिखा होता था, जिससे लोगों को पहचानने में आसानी होती थी. लेकिन अब निगम द्वारा लगाए जा रहे पोस्टर कुछ ही दिनों में निकल जाते हैं और इसका फायदा टैंकर संचालक खुलकर उठा रहे हैं.
स्थिति यह है कि कई टैंकर चालक निगम के पोस्टर हटाकर अपने हिसाब से काम कर रहे हैं और जब उनसे सवाल किया जाता है तो वे गर्मी या पोस्टर खराब होने का बहाना बना देते हैं. कई टैंकर चालक दिन-रात पानी बेचने में लगे हुए हैं और जल संकट के बीच पानी की कालाबाजारी से भी पीछे नहीं हट रहे. टैंकरों की निगरानी और सख्ती की कमी के कारण पानी माफिया बेखौफ होकर काम कर रहा है. वहीं जिम्मेदार ठेकेदार भी इस व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं.
पहचान के लिए स्थायी व्यवस्था हो
हालांकि नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निरीक्षण और कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर टैंकर माफिया की चालाकियों के आगे व्यवस्थाएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं. ऐसे में जरूरत है कि निगम टैंकरों की पहचान के लिए स्थायी व्यवस्था करे और पानी की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके
