तीन साल से मेडिकल कॉलेज में फर्जी डॉक्टर! जीजा की डिग्री पर करता रहा कार्डियोलॉजी विभाग में नौकरी

ललितपुर: स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडीकल कॉलेज) में जीजा की डिग्री पर चिकित्सक बनकर विगत तीन वर्षों से कॉर्डियोलॉजी विभाग संभालने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। हृदय रोग जैसे अतिगंभीर विभाग में मुख्य चिकित्सक के फर्जी निकलने का मामला प्रकाश में आने से हड़कम्प मच गया है। हालांकि इस प्रकरण में जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। लोगों द्वारा फर्जी चिकित्सक द्वारा जिन लोगों के हृदय रोग सम्बन्धित मरीजों की जांच, उपचार व ऑपरेशन इत्यादि किये हैं, उनकी हिस्ट्री निकालकर जांच कराये जाने की मांग उठायी जा रही है।

गौरतलब है कि ललितपुर मेडिकल कॉलेज में एक हृदय रोग विशेषज्ञ पर अपने जीजा की डिग्री का उपयोग कर नौकरी पाने का गंभीर आरोप लगा है। इस शिकायत के बाद डॉक्टर ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. इम्तियाज खान ने बताया कि डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया है और जांच शुरू कर दी गई है। यह आरोप डॉक्टर की बहन ने लगाया है। बहन के अनुसार, डॉक्टर राजीव कुमार गुप्ता जिस एमबीबीएस और एमडी की डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे थे, वे उनकी नहीं बल्कि उनके पति की हैं।

बहन के पति वर्तमान में अमेरिका के एक बड़े अस्पताल में कार्यरत हैं। मध्य प्रदेश के जिला सागर के कस्बा खुरई निवासी डॉक्टर की बहन ने बुधवार को अधिकारियों से शिकायत की थी। उसने कथित दस्तावेजों के साथ कुछ साक्ष्य भी प्रस्तुत किए और फोटो मिलान सहित दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की। बताया जा रहा है कि डॉक्टर और उसकी बहन के बीच मध्य प्रदेश में जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। शिकायत मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मयंक कुमार शुक्ला ने तुरंत जिला प्रशासन को सूचित किया। जिला प्रशासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर की डिग्री और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी।

शिकायत की जानकारी मिलते ही डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2022 में स्वास्थ्य विभाग ने हृदय रोगियों के उपचार के लिए नेशनल हेल्थ मिशन के एनसीडी सेल में कार्डियोलॉजिस्ट एवं जनरल मेडिसिन के पद के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। साक्षात्कार और शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के बाद डॉक्टर को 7 नवंबर 2022 से मेडिकल कॉलेज में तैनाती मिली थी। वह ओपीडी के साथ-साथ गहन हृदय चिकित्सा इकाई की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। डॉक्टर को प्रतिमाह डेढ़ लाख रुपये वेतन दिया जा रहा था। आरोपी चिकित्सक ने नियुक्ति के समय जो दस्तावेज उपलब्ध कराए थे, उनके अनुसार उन्होंने 1991 में कोलकाता मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और 1996 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से एमडी की डिग्री हासिल की थी।

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