
इंदौर. नगरीय पुलिस जोन-3 के नई उम्मीद अभियान के तहत आयोजित काउंसलिंग सत्र में 17 नशे की गिरफ्त में आए युवाओं ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया. पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस सत्र में युवाओं ने अपनी समस्याएं साझा कीं और सामान्य जीवन में लौटने की इच्छा जताई.
इंदौर पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान नई उम्मीद के 21वें सत्र का आयोजन जोन-3 क्षेत्र में किया. कार्यक्रम की शुरुआत अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-3 रामसनेही मिश्रा के मार्गदर्शन में हुई. इस दौरान सहायक पुलिस आयुक्त हीरा नगर रुबीना मिजवानी, थाना प्रभारी बाणगंगा सिया राम सिंह गुर्जर एवं काउंसलिंग समिति के सदस्य उपस्थित रहे. सत्र में शामिल 17 युवाओं से अधिकारियों ने सीधा संवाद किया. शिवम, अश्मित, शिवेन्द्र, आशीष, आकाश, वंश, तनिष्क और यश सहित अन्य युवाओं ने स्वीकार किया कि वे नशे की लत में फंसे हुए थे, लेकिन पुलिस के सकारात्मक व्यवहार और सहयोग से अब वे इससे बाहर निकलकर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं.
नशे की ओर बढ़ने के ये कारण आए सामने
कार्यक्रम के दौरान बाणगंगा थाना क्षेत्र के बीट अधिकारियों ने शिक्षा के प्रति रुचि दिखाने वाले बच्चों को शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की. साथ ही उन्हें नियमित काउंसलिंग के माध्यम से अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित किया जा रहा है. काउंसलिंग में सामने आया कि युवाओं के नशे की ओर बढ़ने के पीछे प्रमुख कारणों में परिवार में नशे का माहौल, आर्थिक कमजोरी, गलत संगति और नकारात्मक सामाजिक प्रभाव शामिल हैं.
नशा छोड़ने वालों को मनोरोग विशेषज्ञों से मुफ्त उपचार की सुविधा भी
पुलिस द्वारा केवल काउंसलिंग ही नहीं, बल्कि नशा छोड़ने के इच्छुक युवाओं के लिए मनोरोग विशेषज्ञों के माध्यम से निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होकर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें. मामले में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 3 रामस्नेही मिश्रा का कहना है कि हमारा उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सही दिशा देना है. नई उम्मीद इसी सोच के साथ शुरू की गई मानवीय पहल है.
