
खंडवा। शहर में यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने और अवैध कब्जों को हटाने के नाम पर शुरू हुआ प्रशासन का बुलडोजर अभियान अब एक बड़े विवाद और आक्रोश में तब्दील होता नजर आ रहा है। शनिवार को लगातार तीसरे दिन भी नगर निगम और प्रशासनिक अमले ने भारी पुलिस बल के साथ नेहरू स्कूल के सामने शाहबाज खान कब्रिस्तान की वक्फ भूमि, जसवाड़ी रोड (माता चौक) और इंदौर रोड स्थित आरटीओ ऑफिस के आसपास ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए गुमठियों और अस्थायी कब्जों को ध्वस्त कर दिया।
पिछले दो दिनों में शिवाजी चौक, सिंधी कॉलोनी, लाल चौकी, खानशाहवली और बड़ा बम क्षेत्र में भी ऐसी ही कार्रवाई देखी गई, जिससे छोटे दुकानदारों में हडक़ंप मचा हुआ है। लेकिन, जैसे-जैसे बुलडोजर की रफ्तार बढ़ रही है, वैसे-वैसे खंडवा प्रशासन की नीयत और कार्रवाई के तरीकों पर भी तीखे सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। इस पूरे अभियान में विशाल डी-मार्ट और खानशाहवली वार्ड में की गई कार्रवाइयों को लेकर जनता और व्यापारियों के बीच भारी असंतोष है, जिसे प्रशासन की दोहरी नीति का सबसे बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।ग्रामीणों और सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के अनुसार, एक तरफ जहां गरीब और मध्यमवर्गीय व्यापारियों की गुमठियों और रोजी-रोटी पर बिना वक्त दिए बुलडोजर चला दिया गया, वहीं बड़े और रसूखदार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों जैसे डी-मार्ट के मामले में प्रशासन का रवैया और कार्रवाई के मापदंड पूरी तरह अलग नजर आए। लोगों का आरोप है कि रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर हाथ डालने में प्रशासन के कदम डगमगा जाते हैं, जबकि सडक़ किनारे पेट पालने वाले छोटे व्यापारियों को निशाना बनाना सबसे आसान काम बन चुका है। खानशाहवली क्षेत्र में हुई कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है, जहाँ भेदभावपूर्ण तरीके से कार्रवाई करने के आरोप लग रहे हैं।
शहर को सुंदर बनाना एकमात्र उद्देश्य, यह सिर्फ औपचारिक भेंट थी
विधायक जी से हुई मुलाकात महज एक औपचारिक भेंट थी, इसका अतिक्रमण विरोधी अभियान से कोई सीधा संबंध नहीं है। प्रशासन की इस मुहिम का एकमात्र उद्देश्य शहर की सडक़ों को चौड़ा करना, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना और खंडवा को सुंदर बनाना है। किसी भी वैध या गरीब व्यापारी को परेशान करना हमारा मकसद नहीं है।
– बजरंग बहादुर, सिटी मजिस्ट्रेट, खंडवा
