बीजिंग, 16 मई (वार्ता) चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि चीन और अमेरिका के बीच विमानों, विमान इंजनों और अन्य कलपुर्जों की खरीद को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है।
मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने चीन द्वारा अमेरिकी विमानों की खरीद के साथ-साथ चीन को अमेरिकी विमान इंजनों और अन्य घटकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही दोनों देश संबंधित क्षेत्रों में सहयोग को और विकसित करना जारी रखने पर भी सहमत हुए हैं।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया था कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमत हुआ है और इस ऑर्डर को भविष्य में 750 विमानों तक बढ़ाने की भी संभावना है। श्री ट्रंप ने जानकारी दी कि इन विमानों में ‘जीई एयरोस्पेस’ के इंजन लगे होंगे।
श्री ट्रंप ने कहा, “वर्तमान समझौते में लगभग 200 विमान शामिल हैं और यदि वे अच्छा काम करते हैं तो 750 विमानों तक की आपूर्ति का वादा किया गया है।”
यह महत्वपूर्ण सौदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग और श्री ट्रंप के बीच बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के तत्काल बाद हुआ है, जिसे चीन ने ‘ऐतिहासिक ‘ करार दिया है।
इस शिखर सम्मेलन को दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से परिभाषित करने वाले एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ दोनों नेता “रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंधों” को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस वार्ता को द्विपक्षीय संबंधों का एक “नया शुरुआती बिंदु” करार दिया है जो एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाने के सही रास्ते को खोजने के प्रयासों को दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में बुसान बैठक के बाद राष्ट्रपति शी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है। साथ ही यह नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है।
विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि इस बैठक ने दुनिया को संदेश दिया है कि चीनी राष्ट्र का पुनरुद्धार और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाना’ (मागा) एक साथ चल सकते हैं और दोनों देश एक-दूसरे की सफलता में सहायक होकर पूरी दुनिया का कल्याण कर सकते हैं।
श्री वांग के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने इस शिखर सम्मेलन को वैश्विक व्यवस्था के भविष्य और चीन-अमेरिका संबंधों के बुनियादी सवालों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया।
उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया एक बार फिर चौराहे पर खड़ी है। इस दौरान दोनों पक्ष कूटनीति, सैन्य संचार, अर्थव्यवस्था, व्यापार, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यटन और जन-स्तर के आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों में आपसी जुड़ाव को विस्तार देने पर सहमत हुए हैं।
