
इंदौर। केनरा बैंक से जुड़े 1.70 करोड़ रुपए के लोन घोटाले का खुलासा हुआ है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने फर्जी दस्तावेजों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से लोन स्वीकृत कराने के मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
ईओडब्ल्यू सूत्रो ने बताया कि जांच के अनुसार मेसर्स ए.वी. ग्राफिक्स के प्रोपराइटर विमलेश चतुर्वेदी ने मनिष बाग क्षेत्र स्थित एक भूखंड के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी कीमत कागजों में कई गुना बढ़ाकर केनरा बैंक में गिरवी रखी. आरोपी ने इसी आधार पर करीब 1.95 करोड़ रुपए के लोन के लिए आवेदन किया. आरोप है कि बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, मंडल प्रबंधक, सेक्शन हेड और प्रोसेसिंग अधिकारी ने नियमों को दरकिनार करते हुए बिना भौतिक सत्यापन और वैध मूल्यांकन के लोन फाइल को मंजूरी दे दी. इस प्रक्रिया में बैंक को करीब 1.70 करोड़ रुपए की आर्थिक हानि हुई. जांच में सामने आया कि जिस संपत्ति की वास्तविक बाजार कीमत करीब 23 लाख रुपए थी, उसे कागजों में 1.25 करोड़ रुपए दर्शाया गया. इसके अलावा भुगतान के लिए भी फर्जी दस्तावेज तैयार किए. दिसंबर 2023 में आरोपी ने करीब 1.75 करोड़ रुपए का टर्म लोन और 20 लाख रुपए की सीसी लिमिट के लिए आवेदन किया था, जिसे नियमों के विपरीत जल्द स्वीकृत कर राशि जारी कर दी गई. ईओडब्ल्यू ने मामले में विमलेश चतुर्वेदी सहित बैंक के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
