बेंगलुरु, 15 मई (वार्ता) विराट कोहली 2027 का वनडे विश्व कप खेलना चाहते हैं लेकिन इसके साथ ही वह ऐसे माहौल का हिस्सा नहीं होना चाहते जहां उन्हें यह महसूस हो कि उन्हें अपनी क्षमता और अहमियत साबित करनी पड़ रही है। टेस्ट और टी 20 से संन्यास ले चुके कोहली ने सीधे तौर पर यह तो नहीं कहा कि भारतीय टीम का माहौल ऐसा है लेकिन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के एक पोडकास्ट में उन्होंने कहा कि वह ऐसी जगह काम करने के इच्छुक नहीं हैं जहां लोग कहते हैं कि “हमें आपकी काबिलियत पर भरोसा है और एक सप्ताह के भीतर ही वह आपके काम करने के तरीके पर ही सवाल उठाने लगते हैं।”
कोहली ने कहा, “हम 2026 के मध्य में हैं, यह सवाल मेरे से काफ़ी बार पूछा गया है। ‘क्या आप 27 का विश्व कप खेलना चाहते हैं?’ निश्चित तौर पर, अगर मैं क्रिकेट खेल रहा हूं तो इसका मतलब है कि मैं खेलना चाहता हूं। मैं इसे जारी रखना चाहता हूं। भारत के लिए विश्व कप खेलना एक शानदार अनुभव होता है।”
कोहली ने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेली अपनी पिछली सात वनडे पारियों में तीन शतक और तीन अर्धशतक लगाए हैं। इस बीच उन्होंने विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में भी हिस्सा लिया था और दो मुक़ाबलों में उन्होंने 131 और 77 रनों की पारी खेली थी।
कोहली ने कहा, “मेरी सोच स्पष्ट है। अगर मैं जिस माहौल का हिस्सा हूं और अपना योगदान देता हूं और उस माहौल में सभी को ऐसा लगता है कि मैं कुछ योगदान दे सकता हूं तो मैं उसका हिस्सा रहूंगा। लेकिन अगर मुझे ऐसा महसूस कराया जाता है कि मुझे अपनी क्षमता और अहमयित साबित करने की ज़रूरत है तो मैं वहां नहीं रहूंगा।”
“क्योंकि मैं अपनी तैयारी के प्रति ईमानदार हूं। मैं जिस तरह से खेल को अप्रोच करता हूं उसके प्रति भी ईमानदार रहता हूं। मैं काफ़ी मेहनत करता हूं। मैं ईश्वर का शुक्रगुज़ार हूं कि उन्होंने मुझे क्रिकेट करियर में सबकुछ दिया जो मुझे मिला है। मैं इस अवसर के लिए ख़ुद को भाग्याशाली और आभारी महसूस करता हूं। और जब मैं खेलने जाता हूं तो किसी भी दूसरे खिलाड़ी या उससे ज़्यादा मेहनत करता हूं। अगर आप चाहते हैं कि मैं किसी वनडे मैच में बाउंड्री से बाउंड्री तक दौड़ूं तो मैं बिना किसी शिकायत के ऐसा करूंगा तो मैं उस हिसाब से तैयारी करता हूं।”
“मैं इस हिसाब से ख़ुद को तैयार करता हूं कि मैं 50 ओवर तक हर एक गेंद पर ऐसे फ़ील्डिंग करूंगा जैसे वो मेरे करियर की आख़िरी गेंद हो। मैं उसी तरह बल्लेबाज़ी करूंगा और विकेटों के बीच दौड़ लगाऊंगा। और टीम के लिए जो कुछ भी मुमकिन होगा मैं वैसा करूंगा। इस तरह से काम करने के बाद भी अगर मुझे ऐसी जगह रहना पड़े जहां मुझे अपनी क्षमता और अहमियत साबित करनी पड़े तो वह जगह मेरे लिए नहीं है और इस बारे में मेरे विचार एकदम स्पष्ट हैं।”
कोहली ने कहा कि वह अब बस आनंद उठाने के लिए खेल रहे हैं न कि किसी को कुछ साबित करने के लिए। कोहली ने कहा, “इसलिए जब मैं दोबारा खेलने गया तो मैं पूरी तरह से स्पष्ट था। मैं वहां किसी को कुछ साबित करने के लिए नहीं जा रहा हूं। मैं खेलने जा रहा हूं क्योंकि मुझे यह खेल खेलना पसंद है। मैंने विजय हज़ारे (ट्रॉफ़ी) भी इसी सोच के साथ खेला था।”
“यह बहुत शानदार अनुभव था। बेंगलुरु में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस (सीओई) में कोई भी मौजूद नहीं था। पहले मैंने सोचा कि मैं इतने लंबे समय से खेल रहा हूं तो क्या यह मेरे लिए प्रेरणादायक होगा? लेकिन जिस पर मेरा विचार बदला और मैंने यह सोचा ‘मैं इसलिए खेलना चाहता हूं क्योंकि मुझे यह खेल पसंद है। मुझे बल्लेबाज़ी करना पसंद और मैं बस इसी चीज़ पर ध्यान देना चाहता हूं’ तो मुझे इस बात की ज़रा सी भी चिंता नहीं रही कि मैं किस मंच पर खेल रहा हूं। ऐसा नहीं है कि मैंने फ़ील्डिंग नहीं की। मैंने पूरे मैच में फ़ील्डिंग की, डाइव लगाई और मुझे फिर से एक बच्चे जैसा महसूस होने लगा। मैंने सोचा, ‘यह किसी के बारे में नहीं है। यह मेरे खेल के बारे में है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।’
“और जिस पल मुझे ऐसा लगता है कि लोग मेरे लिए चीज़ों को मुश्किल बना रहे हैं। और कह रहे हैं कि ‘अरे ऐसा है, वैसा है’ तो मैं उनसे यही कहता हूं कि या तो शुरू-शुरू में ही स्पष्टता और ईमानदारी से बात करें या फिर मुझे खेलने दें।”
कोहली ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह लोग बाहरी थे या उन मैनेजमेंट से थे जिनके साथ वह खेलते हैं। कोहली ने कहा, “देखिए अगर आप उस जगह जाते हैं जहां आप काम करते हैं और लोग कहते हैं कि हमें आपकी काबिलियत पर भरोसा है और एक सप्ताह बाद ही वह आपके काम करने के तरीके पर सवाल उठाना शुरू कर देते हैं तो ऐसा लगता है कि ‘ऐसा क्यों है?’ या ता पहले दिन ही मुझे बता दें कि मैं उतना अच्छा नहीं हूं या मेरी ज़रूरत नहीं है। या अगर आपने कहा है कि मैं अच्छा हूं और आप कहते हैं कि हम कुछ सोच भी नहीं रहे तो फिर शांत रहें।”
कोहली ने कहा कि किसी का भी मूल्यांकन सिर्फ़ नतीजों के आधार पर नहीं होना चाहिए क्योंकि किसी भी क्षेत्र में कोई प्रदर्शन की गारंटी नहीं दे सकता।
कोहली ने कहा, “अगर आप सिर्फ़ नतीजों के आधार पर विचार बदलते रहेंगे तो आप कभी भी एक जैसा रवैया नहीं रख पाएंगे। और मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो इस तरह का बर्ताव करे। जैसा कि मैंने कहा जब मैं खेलने जाता हूं तो मुझे पता होता है कि मैं अपनी तरफ़ से कितनी मेहनत कर सकता हूं। किसी भी क्षेत्र में कोई प्रदर्शन की गारंटी नहीं दे सकता। लेकिन जहां तक मेहनत और लगन की बात है तो मुझे पता है कि मैं क्या कर सकता हूं। क्योंकि वास्तव में मैं अपनी ज़िंदगी इसी तरह जीता हूं।”
“ऐसा नहीं है कि मैं अचानक किसी सीरीज़ से दो या तीन सप्ताह पहले से जी तोड़ तैयारी शुरू करता हूं। मैं पूरे साल ऐसा ही रहता हूं। इसलिए जब आप मुझे खेलने के लिए बुलाते हैं और कहते हैं कि यह सीरीज़ आने वाली है तो मैं तैयार रहता हूं। मैं हमेशा तैयार रहता हूं क्योंकि यही मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी है। मैं वर्कआउट करता हूं और हम घर पर अच्छा खाना खाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझे इसी तरह से जीना पसंद है। ऐसा सिर्फ़ क्रिकेट खेलने के लिए नहीं करता।”
